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ये कौन सी योग्यता? हारी हुईं ईरानी के पास 2 मंत्रालय, 7वीं बार के MP संतोष गंगवार सिर्फ राज्यमंत्री

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

स्मृति ईरानी को मानव संसाधन जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय देने के बाद मोदी सरकार को तमाम आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार में स्मृति ईरानी को मानव संसाधन के कैबिनेट मंत्री पद से हटा दिया गया था. तब जोर शोर से भगवाधारियों ने कहा था कि पीएम मोदी योग्यता को तरजीह देते हैं. अब एक बार फिर ये भ्रम टूटता नजर आ रहा है।

अब एक बार फिर स्मृति ईरानी को कपड़ा मंत्रालय के साथ ही सूचना प्रसारण मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। सोशल मीडिया पर स्मृति ईरानी को महत्वपूर्ण मंत्रालय देने के बाद लोगो ने फिर पीएम मोदी पर सवाल दागे हैं कि आखिर स्मृति ईरानी में ऐसी कौन सी योग्यता है जो हारे हुए नेता को बार-बार बड़ी जिम्मेदारियों से नवाजा जा रहा है। वहीं 7 वीं बार सांसद चुने गए संतोष गंगावार को स्वंतत्र प्रभार से भी हटाकर  सिर्फ राज्यमंत्री वित्त बनाए हुए हैं।

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मोदी मंत्रिमंडल में 12 महत्वपूर्ण मंत्रालय ब्राह्मणों के पास- 

मोदी मंत्रिमंडल अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, सुरेश प्रभु, नितिन गडकरी, अनंतकुमार, कलराज मिश्र, प्रकाश जावडेकर, महेश शर्मा, राजीव प्रताप रूढ़ी, बंडारू दत्तात्रेय और महेंद्र नाथ पांडे के रूप में ब्राह्मण मंत्रियों का दबदबा बरकरार है।

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पीएम मोदी बताते थे खुद को पिछड़ा-

पीएम मोदी ने 2014 के आम चुनाव के दौरान खुद को चिल्ला-चिल्लाकर पिछड़ी जाति का बताते थे। पर आज उन्हीं के शासन में पिछड़ी जाति के नेताओं और पिछड़ी जाति के लोगों के साथ अन्याय हो रहा है। हकीकत ये है कि मोदी सरकार के कैबिनेट में 90 फीसदी सवर्ण जाति के नेता हैं। हालात ये हैं कि कैबिनेट में पिछड़ी जाति के सिर्फ दोनेता जगह बना पाएं हैं।

हारे हुए नेताओँ को दो मंत्रालय- 

हालत ये है कि पिछड़े नेता यदि सवर्ण नेताओं से योग्य भी है तो भी उसकी पिछड़ी जाति के चलते उसकी योग्यता का सम्मान नहीं मिल पा रहा है। ताजा मामले में अमेठी से चुनाव हारकर स्मृति ईरानी तो बन गईं कैबिनेट मंत्री, पर 7 बार बरेली से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भी संतोष गंगवार केवल बन पाये राज्यमंत्री। इतना ही नहीं चुनाव हारे अरुण जेटली को वित्त जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय के साथ ही रक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है।

कुर्मी समेत पिछड़े गायब- 

कुर्मी जाति से ताल्लुक रखने वाले नेताओं को किनारे लगाने में सबसे बड़ा नाम वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार का है। संतोष गंगवार  7 वीं बार यूपी की बरेली लोकसभा के लिए चुने गए हैं। पर मोदी सरकार ने उनकी इस योग्यता का ये ईनाम दिया है कि उन्हें सिर्फ केन्द्र की सरकार में राज्यमंत्री बना दिया है जबकि अमेठी से चुनाव हारने वाली स्मृति ईरानी को कैबिनेट मंत्री बनाकर सम्मानित किया गया है।

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इतना ही नहीं ब्राह्मण नेक्सस का लाभ उठाकर पहली बार लोकसभा पहुंचे कलराज मिश्रा को कैबिनेट में जगह दी गई है। संतोष गंगवार इससे पहले भी अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में पेट्रोलियम और संसदीय कार्य राज्यमंत्री रह चुके हैं।

2003 में स्मृति ने ज्वाइन की थी बीजेपी 1989 में सांसद हो गए थे संतोष गंगवार- 

कुर्मी समाज को नजरअंदाज करने का सबसे बड़ा आलम देखिए 2003 में स्मृति ईरानी ने जब बीजेपी ज्वाइन की थी उस समय संतोष गंगवार बरेली से लगातार तीसरी बार सांसद चुनकर संसद में बैठे हुए थे। जबकि स्मृति ईरानी 2014 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ी वो भी हार गईं।

कुर्मी समाज सिखाएगा सबक- नरसिंह पटेल अज्ञानी 

मोदी सरकार के जातिवादी और दोहरे रवैये से बरेली समेत रुहेलखंड में ही नहीं बल्कि समूचे उत्तर प्रदेश की कुर्मी जाति के लोगों में खासी नाराजगी है। अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के मुख्य राष्ट्रीय महासचिव नर सिंह पटेल अज्ञानी का कहना है कि ये कहां का न्याय है कि पहली बार चुनाव जीतने वाले कलराज मिश्रा को ब्राह्मण होने के कारण कैबिनेट में जगह दे दी जाति है पर लगातार 7वीं बार चुनाव जीतकर भी संतोष गंगवार के साथ जाति, के आधार पर भेदभाव करके उनको राज्यमंत्री बनाया जाता है।

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नर सिंह पटेल अज्ञानी कहते हैं कि यही व्यवहार उत्तर प्रदेश में विधायकों के साथ भी हुआ है। यूपी की कुर्मियों में इस बार खुलकर बीजेपी के समर्थन में वोट डाले थे उसका परिणाम ये हुआ कि 27 विधायकों में से सिर्फ कुर्मी समाज को 1 कैबिनेट मंत्री नसीब हुआ। बीजेपी की पिछली सरकारों में भी कुर्मी समाज की स्थिति इतनी खराब नहीं रहती थी।

उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उसके जातिवादी रवैये का सबक सिखाने के लिए कुर्मी ही नहीं पिछड़ा वर्ग ने कमर कस ली है।

संतोष गंगवार का सफरनामा- 

7 बार बरेली से लोकसभा चुनाव जीतने वाले संतोष गंगवार देश में आपातकाल के दौरान सरकार विरोधी आंदोलन को लेकर जेल भी जा चुके हैं। वह 1996 में उत्तर प्रदेश भाजपा के महामंत्री बनाए गए थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में कार्य समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। 13वीं लोकसभा में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी सरकार में वह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री के साथ-साथ संसदीय कार्य राज्य मंत्री का पदभार भी संभाल चुके हैं।

इसके अलावा वह विज्ञान एवं तकनीकि राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। राजग सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके संतोष गंगवार 16वीं लोकसभा में भी सांसद चुने गए हैं। वह उत्तर प्रदेश के बरेली से 1989 से चुनाव जीतते आ रहे हैं। हालांकि सिर्फ एक बार 2009 लोकसभा में उन्हें कांग्रेस के प्रवीण सिंह एरन के हाथों हार झेलनी पड़ी थी।

 

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