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दर्जनों मामलों में आरोपी योगी और शिवराज के इस्तीफे की मांग तेज, लोग बोले सफाई का ठेका तेजस्वी ने ले रखा है क्या?

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

नैतिकता की छलावे पर देश को नचाने वाला सवर्ण मीडिया गठजोड़ अपनी नैतिकता की बात आने पर खामोश हो जाता है, चुप्पी मारे लेता है> विरोध प्रदर्शन करो या ज्यादा टटोलो तो वो खुद और बीजेपी के नेता अकड़ जाते हैं,  नहीं देंगे इस्तीफा मचा लो जितना हंगामा मचाना हो। इस समय नरोत्तम मिश्रा का मामला उदाहरण की बेजीपी ऐसी ही दोहरी नैतिकता की शिकार है।

दर्जनों मामले दर्ज होने के बाद भी बीजेपी महंत आदित्यनाथ को सीएम और केशव मौर्य को डिप्टी सीएम बना देती है। मध्यप्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा की विधायकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जाने के बाद भी शिवराज उसको मंत्री पद से नहीं हटाते हैं लेकिन बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के मामले में उसकी सारी नैतिकता राजनीतिक शुचिता सामने आ जाती है।

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सोशल मीडिया पर इसी दोहरी मानसिकता पर लोगों ने हमला बोला है। लोगों ने पूछा है कि सारी राजनीतिक गंदगी दूर करने की जिम्मेदारी सिर्फ तेजस्वी यादव की है क्या ?

देश के जनमानस में कौंध रहा एक सवाल, नैतिकता के आधार पर इस्तीफा किसे देना चाहिए?

तेजस्वी यादव- 

– वो व्यक्ति जिसपे धारा 120B और धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज हो, तथाकथित अपराध के समय जिसकी उम्र 13 या 14 साल हो? (अभियुक्त तेजस्वी यादव, उपमुख्यमंत्री, बिहार)

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महंत आदित्यनाथ- 

– या वो व्यक्ति जिस पर धारा 506, 307, 147, 148, 297, 336, 504, 295, 153A, और 435 के तहत मुकदमा दर्ज हो? ( अभियुक्त अजय सिंह बिष्ट उर्फ आदित्य नाथ योगी, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

केशव प्रसाद मौर्य- 

3- या फिर वो जिसके ऊपर 302/ 120 B/ 153 A/ 188/ 47/ 148/ 153/ 153 A/ 352/ 188/ 323/ 504/ 506/ 147/ 295 A/ 153/ 420/ 467/ 465/ 171/ 188/ 147/ 352/ 323/ 504/ 506/ 392/ 153A/ 353/ 186/ 504/ 147/ 332/ 147/ 332/ 504/ 332/ 353/ 506/ 380/ 147/ 148/ 332/ 336/ 186/ 427 143/ 353/ 341 इन धाराओ के तहत मुकदमा दर्ज हो? ( अभियुक्त केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश)

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नरोत्तम  मिश्रा- 

म.प्र. में चुनाव में अवैध तरीका अपनाने वाले मंत्री नरोत्तम मिश्रा का चुनाव रद्द हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि वो राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे। खैर, नरोत्तम मंत्री बने रहेंगे। व्यापम वाले शवराज बने हैं, तो नरोत्तम क्यों हटने लगे भला।

शिवराज सिंह चौहान- 

व्यापम जैसा महाघोटाले के आरोपी जिसमें दर्जनों लोगों की जान गई। करोड़ों रुपये के इस महाघोटाले के लिए शिवराज सिंह चौहान से इस्तीफा क्यों नहीं मांगा जा रहा है।

बाबू भाई बोखिरिया- 

गुजरात अदालत ने राज्य की नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे बाबू भाई बोखिरिया और तीन अन्य अपराधियों को 54 करोड़ के चूना-पत्थर खनन घोटाला मामले में तीन साल की कैद की सज़ा सुनाई है। बोखिरिया दिसम्बर 2012 के विधानसभा चुनाव में पोरबंदर से चुने गये थे और नरेन्द्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल था। इसके बाद आनंदीबेन पटेल और मौजूदा विजय रूपानी सरकार में भी बाबूभाई बोखिरिया कैबिनेट मंत्री धड़ल्ले से बने हुए हैं।

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इसके अलावा रमन सिंह, नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज, निहाल चंद गहलोत जैसे तमाम भाजपाईयों पर घोटाले के आरोप हैं।

हां, तेजस्वी यादव इस्तीफा दें। राजनीति स्वच्छ करनी है। तेजस्वी ने 14 साल की उम्र में ‘भारी’ भ्रष्टाचार किया था। इसकी शिकायत 5 जुलाई को हुई और 6 जुलाई को सीबीआई ने छापा डाल दिया।

भाजपा इस्तीफा केवल तेजस्वी से मांग रही है। क्योकि योगी और मौर्य का फैसला अदालत करेगी और तेजस्वी का फैसला गिरोह करेगा। यह नैतिकता की नंगई नही तो क्या है?

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