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सुमित पटेल को गोली मारने वाले ‘सिंहों’ के बचाव में योगी पुलिस, 8 पीड़ित कुर्मियों को ही ठूंसा जेल में

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो

सूबे में योगी आदित्यनाथ उर्फ अजय सिंह बिष्ट की सरकार क्या बनी उनके स्वजातीय भाई बंधुओं में अचानक से सत्ता के करीबी होने का दंभ आ गया. पूरे प्रदेश में होने वाले अपराधों में अचानक से आरोपी ठाकुर बिरादरी के लोगों की संख्या में इजाफा होने लगा.सामाजिक रूप इस सत्ता के घमंड को कतई अच्छा नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन ये सच है कि दलित-ओबीसी के प्रति इस सरकार में अपराध बढ़ा है.ना सिर्फ अपराध बढ़ा है बल्कि अपराध के बाद प्रशासनिक अमले की तरफ से भी भेदभाव पूर्ण कार्रवाई हुई है.

रायबरेली में बीएससी के छात्र सुमित पटेल की बाइक में टक्कर मारी गई. सुमित की बहन घायल हुई. विरोध जताे पर सुमित को मारापीटा गया. इसके बाद सुमित को गोली मार दी गई. पुलिस ने सुमित के भाई को बेरहमी से पीटा. अब सुमित के परिवार के ही 8 लोगों को जेल में ठूंस दिया गया.

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योगी पुलिस अन्याय कर रही है पीड़ित पक्ष के साथ-

इस पूरी कार्रवाई में प्रशासन के भेदभावपूर्ण रवैये को देखते हुए पूरे प्रदेश के कुर्मी समाज में आक्रोश है. गुरुवार को कुर्मी स्वाभिमान महासंघ के संयोजक सुशील कटियार, कुर्मी साधना सिंह समेत पूरी टीम रायबरेली पहुंची और पीड़ित परिवार से मुलाकात की. सुशील कटियार ने नेशनल जनमत से बातचीत में बताया कि पीड़ित पक्ष के लोगों के साथ बेइंतहा जुल्म किया जा रहा है. अनुज के छोटे नाबालिग भाई को बुरी तरह से पीटा गया है. पुलिस पीड़ित पक्ष के ही 19 लोगों को थाने ले आई. बुरी तरह मारापीटा. इसके बाद 11 लोगों को छोड़ दिया गया, 8 लोगों को बवाल करने के आरोप में जेल भेज दिया गया.

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क्या है घटना जो मीडिया ने आपको बताई नहीं-

कुर्मी स्वाभिमान संघ की साधना सिंह सचान ने बताया कि मीडिया जो घटना बता रही है वो गलत तरीके से पेश की जा रही है. पीड़ित पक्ष के अनुसार मीडिया ने घटना को गलत तरीके से दिखाया है. असली मामला यह है-

महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के हलोर निवासी 18 वर्षीय सुमित पटेल उर्फ शुभम चौधरी पुत्र जगत नारायण पटेल बीएससी का छात्र था. सुमित अपनी बहन शालिनी को गुरुकुल महाविद्यालय छोड़ने बाइक से जा रहा था. पीछे से लालगंज कोतवाली क्षेत्र के सेमरपहा गांव निवासी संजीव कुमार सिंह एक अन्य व्यक्ति के साथ कार से आया और पीछे से सुमित की बाइक में टक्कर मार दी जिससे उसकी बहन गिरकर घायल हो गई. सुमित के विरोध जताने पर संजीव सिंह ने उसके साथ गालीगलौच करते हुए मारपीट कर दी.

इतना ही नहीं सुमित पटेल को पकड़कर संजीव सिंह अपने ससुर दान बहादुर सिंह के घर पहुंच गया. घर के लोगों को पता लगने पर सुमित के चाचा और भाई दान बहादुर के घर पहुंचे. यहां फिर जातीय ठसक दिखाते हुए सुमित के चाचा और भाई के साथ संजीव सिंह, दानबहादुर सिंह और जगत बहादुर सिंंह ने गाली गलौच और मारपीट की  और लोहे की रॉड सुमित पटेल से सर पर मार दी. गुस्से में सुमित के परिवार के लोगों ने भी हाथापाई करने की कोशिश की तो दानबहादुर बोला गोली मार दो सालों को. जातीय मद में चूर संजीव सिंह घर के भीतर गया और रिवाल्वर लाकर फायरिंग शुरू कर दी. जिसमें सुमित पटेल की गोली लगने से मौत हो गई और सुमित के चाचा श्रीनिवास पटेल लखनऊ में जिंदगी मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं.

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हमला दिखाने के लिए खुद ही लगा ली गाड़ी में आग- 

गोली लगने की सूचना पर सुमित के गांव के कई लोग दानवीर सिंह के घर पर पहुंचे तो डरे हुए संजीव सिंह और दानवारी सिंह ने अपनी गाड़ी में आग लगा ली और खुद को मकान में बंद कर लिया. इतना ही नहीं अंदर से फिर से संजीव ने फायरिंग करनी शुरू कर दी. सूचना पाते ही मौके पर पुलिस पहुंच गई और दोनों को भीड़ से बचाते हुए थाने ले आई. .

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पुलिस पर लगाया आरोपी को बचाने का आरोप-

अनुज पटेल के परिजनों का आरोप है कि पुलिस जातिवादी मानसिकता से काम कर रही है और आरोपियों को बचाने की नियत में है. एक स्थानीय पत्रकार के अनुसार आईजी लखनऊ रेंज जयनारायण सिंह इस मामले में बहुत सक्रिय हैं. उनकी सक्रियता का परिणाम ये है कि पुलिस की तरफ से मामले को कमजोर करने के लिए जो रिपोर्ट भेजी गई है उसमें आत्मरक्षा में गोली चलाने की बात कही जा रही है. जबकि घटना में कहीं भी आत्मरक्षा जैसी बात सामने नहीं आ रही.

गांव के लोगों ने बताया कि स्थानीय पुलिस का मृतक के साथ ऐसा सलूक है कि जैसे इन्होंने आरोपियों को गोली मारी हो.

नेशनल जनमत के सवाल- 

यूपी पुलिस के पूर्व डीआईजी डीके चौधरी के अनुसार परिजनों की बताई हुई घटना से स्पष्ट है कि आरोपियों ने आत्मरक्षा में नहीं बल्कि अपना रौब कायम करने की नियत से गोली चलाई है. पूरी घटना से साफ है कि प्रशासन दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई कर रहा है. प्रशासन कभी किसी जाति विशेष का नहीं होत है ना ही उसे जाति विशेष की नियत से काम करना चाहिए. बड़ी हैरत की बात है कि पीड़ित पक्ष को ही पुलिस की तरफ से दोषी ठहराया जा रहा है. श्री चौधरी का कहना है कि सेल्फ डिफेंस तय करना पुलिस का काम नहीं है यह कोर्ट तय करती है.

क्या सुमित पटेल या उसके चाचा या परिजन कोई हथियार लिए हुए थे?

क्या दोनों आरोपियों के शरीर पर खरोंच या चोट का निशान है?

क्या किसी मारपीट की घटना में गोली मार देना भी सेल्फ डिफेंस के दायरे में आता है?

पुलिस ने पीड़ित पक्ष के लोगों पर ही दमनात्नक कार्रवाई क्यों की?

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डीजीपी से मिलेगा पीड़ित पक्ष- 

कुर्मी स्वाभिमान महासंघ पीड़ितों के साथ डी़जीपी सुलखान सिंह मुलाकात करके उनके सामने सारे पहलू और पुलिस उत्पीड़न की बात रखेगा. इसके बाद भी अगर पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो धरना-प्रदर्शन कर आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी.

सरकार के प्रति बढ़ रहा है कुर्मी समाज में असंतोष-

इलाहाबाद में ब्राह्मणों द्वारा अनुज पटेल की पीट पीटकर हत्या, फतेहपुर में फार्मासिस्ट दिलीप पटेल की गोली मारकर हत्या और झांसी में पीतांबर पटेल के साथ ठाकुर समाज के लागों द्वारा की गई मारपीट अभद्रता, प्रतापगढ़ में अपना दल की ब्लाक प्रमुख को धमकी और अब रायबरेली मेे हत्या के बााद पीड़ितों को ही जेल मेें ठूंस देने की घटना से कुर्मी समाज में सरकार के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है. कुर्मी स्वाभिमान महासंघ, बुंदेलखंड कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति और तमाम अन्य संगठनों ने घटनाओं पर रोष व्यक्त करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है.

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गुरुवार को कुर्मी स्वाभिमान महासंघ ने रायबरेली में कुर्मी शिवधारी पटेल के घर पर बैठक आयोजित की. जिसमें राष्ट्रीय संयोजक पूर्व राज्यमंत्री कुर्मी सुशील कटियार, कुर्मी अवधेश सिंह,  दिलीप पटेल, गोविंद पटेल और प्रदेश संयोजक कुर्मी साधना सचान मौजूद रहीं. बैठक में घटना की सीबीआई जांच कराने और पीड़ित पक्ष पर दमनात्मक कार्रवाई को लेकर डीजीपी से मिलने की बात कही गई.

 

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