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120 महिलाओं को देहव्यापार से मुक्त कराकर, नेहरू जन्मस्थान पर लगा कलंक मिटाने वाले कर्मयोगी ‘सुनील चौधरी’

नई दिल्ली, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

कहते हैं जिस इंसान के दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो उसके सामने बड़ा से बड़ा लक्ष्य भी छोटा हो जाता है। सामंतवादी व्यवस्था में स्त्री को देवदासी बनाकर और राजशाही में हरम बनाकर उसको उपभोग की वस्तु बना दिया जाता था।

इस तथाकथित लोकतंत्र में हरम का ही एक परिवर्तित रूप है रेड लाइट एरिया। जहां स्त्री की अन्तर्रात्मा के साथ ही उसका मान, सम्मान, स्वाभिमान और स्त्रीत्व का सबसे बड़ा गहना उसकी लज्जा तक इसी समाज के नकाबपोश लोगों द्वारा छीन ली जाती है।

महिला सशक्तिकरण और अधिकारों के लिए महिलाओं को रेड लाइट एरिया और कोठों से निकालकर समाज की मुख्यधारा में जोड़ने की जरूरत है। इसी जरूरत को देखते हुए इलाहाबाद के समाजसेवी सुनील चौधरी ने ये नेक काम किया है।

प्रथम प्रधानमंत्री के जन्मस्थान को बना दिया था वेश्यालय- 

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्मस्थली मीरगंज इलाहाबाद कई सालों से कलंकित थी। मीरगंज जगह के नाम को लोग रेड लाइट एरिया होने की वजह से हिकारत की नजरों से देखते थे।

समाजसेवी व हाइकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने इस कलंक को मिटाने का प्रण लिया। 3 साल की कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद श्री चौधरी ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य करते हुए 120 महिलाओं को देहव्यापार से मुक्त कराया।

नेहरू के जन्मदिवस पर लिया था प्रण- 

सुनील चौधरी ने बताया कि उन्होंने नेहरू जी के जन्मदिन 14 नवंबर 2014 को रेड लाइट एरिया चौक मीरगंज से बन्द कराने के लिए आंदोलन कि नींव रखी थी।

आंदोलन के क्रम में समाजसेवी चौधरी घंटाघर स्वर्गीय छुन्नन गुरु की प्रतिमा स्थल पर लगातार 1 साल धरने पर बैठे रहे। इस दौरान हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को इस आन्दोलन मे जोड़ा गया।

जैसा कि हर जुनूनी व्यक्ति के साथ शुरूआत में होता है, लोग हंसे और उन्हे पागल तक कहा गया। लेकिन धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए कारवां बढ़ता गया। रैलियां हुईं, इलाहाबाद में कोतवाली का घेराव हुआ। इसके बाद सामाजिक संगठन और कई राजनीति दलों ने भी अपनी क्षमता के हिसाब से उनका सहयोग दिया।

अांदोलन के दौरान जेल भी गए-

आंदोलन के दौरान देहव्यापार से जुड़े दलालों ने श्री चौधरी को जान से मारने की धमकी भी दी फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। सुनील चौधरी के मानें तो किसी भी तरह उन्हे झुकता ना देख कोतवाली पुलिस ने उनको 80 हजार रुपये महीने देने की बात भी कही।

एक बार तो ट्रेनी आईएएस और तत्कालीन एसडीएम सदर हर्षिता माथुर से रेड लाइट एरिया बंद कराने को लेकर बहस इतनी बढ़ गई कि एसडीएम ने अपनी कुर्सी और ताकत का उपयोग करते हुए उन्हे लाठियों से पिटवाकर जेल भी भेजवा दिया ।

इस सबके बाद भी समाजसेवी चौधरी टूटे नहीं। जेल से बाहर आने पर नई तरीके से आंदोलन की तैयारी कर उच्च न्यायायल में जनहित याचिका दाखिल कर खुद कोर्ट मे अपनी बात रखी। कोर्ट ने लंबी बहस के बाद आखिरकार समाजसेवी की मांग को जायज मानते हुए मीरगंज स्थित रेड लाइट एरिया को हटाने का आदेश दे दिया।

इतना ही नही इसके बाद चौधरी ने नेहरू जी की जनमस्थली 77 मीरगंज को भी चिन्हित करवा दिया जिस घर मे वह पैदा हुए थे। उसी मुहल्ले में ही रेड लाइट एरिया हुआ करता था।

दो साल के लंबे संघर्ष के बाद मिली थी सफलता- 

14 नवंबर 2014 को आंदोलन की रूपरेखा रखने के बाद दो साल के लंबे संघर्ष के बाद, 2 मई 2016 को देहव्यापार से 120 महिलाओ को मुक्त कराकर देहव्यापार का अड्डा सील कर बन्द करा दिया गया।

इस आंदोलन में 120 महिलाओं को मुक्त होने पर और देहव्यापार का अड्डा बन्द होने पर एलआईयू की रिपोर्ट व हाइकोर्ट के निर्देश पर सुनील चौधरी को सुरक्षा भी उपलब्ध कराई गई।

दिल्ली में मिला सम्मान- 

हाल ही में राइजिंग इंडिया संस्था दिल्ली द्वारा “मैन आफ द ईयर “अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। पुरस्कार महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य करने पर दिया गया।

समाजसेवी कैसे बने सुनील चौधरी ?

सुनील चौधरी उत्तर प्रदेश की बस्ती जिले के बढ़कुईयां गांव के मूल निवासी हैं। पिता रामशंकर चौधरी और माता अनारी देवी के दूसरे पुत्र हैं।

पिता बिजली विभाग से सेवानिवृत्त अवर अभियंता हैं, उनकी सरकारी नौकरी के कारण ही सुनील चौधरी का जन्म और शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई।

जॉनसन गंज स्थित लगेज वर्ल्ड नाम से अपना अच्छा खासा जमा जमाया कारोबार छोड़कर सुनील चौधरी ने समाजसेवा का रुख अख्तियार किया तो घर परिवार और ससुराल के लोगों को भी उनका ये कदम पागलपन लगा।

लेकिन उनके बड़े भाई हृदय राम चौधरी जो दिल्ली में व्यापार करते हैं उन्होंने सुनील चौधरी की बात को समझा और उनको पूरा समर्थन और सहयोग देते हुए काम करने की प्रेरणा दी।

नौवीं में दोस्तों ने उड़ाया था मजाक- 

समाजसेवी सुनील चौधरी ने बताया कि 1994 में आठवीं पास करने के बाद वो मीरगंज स्थित केसर विद्या पीठ इंटर कॉलेज में नौंवी करने पहुंचे थे। सुनील ने बताया कि वहां का छात्र होने के कारण एक दिन दोस्तों ने उनका मजाक बनाया।

लड़कों ने हसते हुए कहा कि सुनील तो रेड लाइट एरिया में पढ़ता है। बस यही बात उनके दिल में चुभ गई। बस नौवीं में पढ़ते हुए ही सुनील चौधरी को पता लगा कि इस रेड लाइट एरिया में तो नाबालिग लड़कियों को भी लाकर बेच दिया जाता है।

बस इसके बाद से ही सुनील चौधरी ने ये प्रण कर लिया कि महिला शोषण को बंद कराने के लिए वो हर हाल में आंदोलन करेंगे और इसे बंद कराकर ही रहेंगे।

2014 में आपने महिलाओं को गुलामी की दासतां से मुक्त कराने का संकल्प लिया और आज की स्थिति में वहां से रेड लाइट एरिया खत्न हो गया है। जिस स्कूल केसर विद्यापीठ से ये संघर्ष की कहानी शुरू हुई थी आज वहां बालिकाएं भी बैखोफ होकर अध्ययन करने जा रही हैं।

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