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अब SC-HC के कई पूर्व जस्टिस ने लगाए आरोप, CJI दीपक मिश्रा अहम मामले अपने चहेते जजों को देते हैं

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

लोकतंत्र बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से निकलकर लोगों के बीच अपनी आवाज पहुंचाने वाले 4 जजों के आरोपों के बाद देश के चीफ जस्टिस और इंडिया और न्यायप्रणाली पर एक बार फिर उंगली उठ गई हैं।

सुलह की संभावनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई पूर्व जज प्रेस कांफ्रेंस करने वाले जजों के समर्थन में आ गए। जिससे एक बार फिर न्यायपालिका में गड़बड़झाले का मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन जस्टिस पीबी सावंत के साथ हाईकोर्ट के कई पूर्व न्यायाधीशों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के नाम खुला पत्र लिखा है.

चीफ जस्टिस के विशेषाधिकार को पारदर्शी बनाएं- 

इस पत्र में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चार नाराज न्यायाधीशों का समर्थन किया है. नाराज न्यायधीशों की ओर से उठाए गए मुद्दे का समर्थन करते हुए उन्होंने लिखा कि बेंच बनाने और सुनवाई के लिए मुकदमों का बंटवारा करने के मुख्य न्यायाधीश के विशेषाधिकार को और ज्यादा पारदर्शी और नियमित करने की जरूरत है.

चार मौजूदा जजों के आरोपों का समर्थन करते हुए खुला पत्र लिखने वाले पूर्व जजों के कहना है कि हाल के महीनों में मुख्य न्यायाधीश अहम मुकदमें वरिष्ठ जजों की बेंच को भेजने की बजाय अपने चहेते कनिष्ठ जजों को भेजते रहे हैं. बेंच बनाने, खासकर संविधान पीठ का गठन करने में भी वरिष्ठ जजों की उपेक्षा की जाती रही है.

खुले पत्र में कई जजों ने किए साइन- 

लिहाजा मुख्य न्यायाधीश खुद इस मामले में पहल करें और भविष्य के लिए समुचित और पुख्ता न्यायिक और प्रशासनिक उपाय करें. पत्र पर जस्टिस पीबी सावंत के अलावा दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ए.पी शाह, मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस के. चन्द्रू और बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस एच. सुरेश भी शामिल हैं.

बता दें कि दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के 4 सिटिंग जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी.

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