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किस-किसकी जुबान काटोगे, आजम से पहले सुप्रीम कोर्ट भी सेना पर खड़ा कर चुका है यही सवाल

नई दिल्ली । नेशनल जनमत ब्यूरो।

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के ‘सेना के रेप वाले’ बयान पर विश्व हिन्दू परिषद के नेता और शाहजहांपुर के जिलामंत्री राजेश अवस्थी ने आजम खान की जुबान काटकर लाने वाले को 50 लाख रुपए इनाम देने की घोषणा की है।

आजम खान से पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए भारत सरकार से पूछा था कि क्या सरकार ने सेना के जवानों को भारतीय महिलाओं का बलात्कार करने के लिए खुला छोड़ दिया है ?

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तब इस मामले में किसी राजनीतिक दल ने सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर सवाल नहीं उठाया था। जैसे ही इस मामले सामने वाला पक्ष मुस्लिम हुआ तो राजनीतिक दल अपनी राजनीतिक रोटी सैंकने में जुट गए.

सेना के शौर्य पर गर्व है लेकिन सवाल से बचा नहीं जा सकता- 

विश्व हिंदू परिषद के नेता राजेश अवस्थी ने कहा कि भारतीय सेना के कारण ही हम सब चैन की सांस लेते हैं। यहां तक तो बात एकदम सही हकीकत में सैनिकों के शौर्य की बदौलत ही हम चैन की नी्ंद ले रहे हैं. लेकिन आगे उन्होंने कहा कि सैनिकों के खिलाफ जो आजम खान ने टिप्पणी की है वह बहुत ही गलत है. आजम खान जैसे लोगों को भारत से निकाल दिया जाना चाहिए।

अवस्‍‌थी ने खान पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी भारत माता पर टिप्पणी की थी और अब सैनिकों के खिलाफ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक देश में आजम खान जैसे लोग रहेंगे तब तक इसका कल्याण नहीं हो पाएगा।  इस बात से सहमत इसलिए नहीं हुआ जा सकता कि यही सवाल सुप्रीम कोर्ट और तमाम सामाजिक संगठन पहले भी उठा चुके हैं.

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गौरतलब हो कि यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने रामपुर में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भारतीय सेना के जवानों के बारे में कहा था कि महिलाएं जवानों के लिंग क्यों काट रही हैं.

आपको बता दें कि पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले में नक्सली महिलाओं पर जवानों के लिंग काटने का आरोप लगा था। इसी घटना पर टिप्पणीं करते हुए ‘आजम ने कहा कि कश्मीर, झारखण्ड और असम में औरतों ने फौज को मारा और महिला दहशतगर्द उनके निजी अंग काट कर ले गईं। यह इतना बड़ा संदेश है जिस पर पूरे भारत को शर्मिन्दा होना चाहिए और सोचना चाहिए कि हम पूरी दुनिया को क्या मुंह दिखाएंगे’।

क्या आजम खां ने गलत कहा है ?

सवाल ये है कि क्या सपा नेता आजम खां ने गलत कहा है? क्या बीते दिनों नक्सली महिलाओं ने छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले में सैनिकों के गुप्तांगों को नहीं काटा था? क्या सैनिकों पर अपने ही देश की महिलाओं का बलात्कार करने का आरोप नहीं लगा है?

अगर ऐसा है तो विश्व हिंदू परिषद के नेता किस मुंह से सपा नेता पर सवाल उठा रहे हैं ? और यदि ऐसा नहीं है तो फिर सुप्रीम कोर्ट क्यों सेना पर बलात्कार करने के मामले में कई फैसले दे चुका है? यहां तक कि भारतीय सेना ने खुद अपने कई जवानों को अपने ही देश की महिलाओं का बलात्कार करने के मामले में सजा सुनाई है?

क्या देशभक्ति के नाम पर भारतीय सैनिकों द्वारा अपने ही देश की महिलाओं का बलात्कार करना उचित है? दरअसल भाजपा और उसके अनुशांगिक संगठन देशभक्ति के नाम पर भारतीय सैनिकों के हर गलत काम को भी जायज ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

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हिंदी दैनिक नई दुनिया की ये खबर पढ़नी चाहिए…

(सुकमा)। सोमवार को सुकमा जिले के बुरकापाल में हुए नक्सली हमले में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि महिला नक्सलियों ने करीब 6 शहीद जवानों के गुप्तांग काट दिए हैं।

बस्तर में तैनात जवानों द्वारा आदिवासी महिलाओं व युवतियों के साथ ज्यादती के आरोप लगते रहे हैं। इस अमानवीय कृत्य को महिला नक्सलियों की बदले की कार्रवाई के रूप में भी देखा जा रहा है।

धारदार हथियार से करीब 6 शहीद जवानों के गुप्तांग काट दिए। बुरकापाल हमले में शामिल नक्सलियों में लगभग एक तिहाई महिला थीं, इसके चलते इस बात को और बल मिल रहा है।

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पहले भी दिखा है अमानवीय चेहरा- 

पूर्व की मुठभेड़ों में भी नक्सलियों का अमानवीय चेहरा सामने आता रहा है। वर्ष 2007 में बीजापुर जिले के रानीबोदली में सीआरपीएफ कैम्प पर नक्सली हमले में 55 जवान व एसपीओ शहीद हुए थे। तब नक्सलियों ने धारदार हथियार से कुछ जवानों के सिर धड़ से अलग कर दिए थे। झीरम-2 के नाम से चर्चित टाहकवाड़ा मुठभेड़ में शहीद जवानों के शवों को टंगिए व धारदार हथियारों से गोदा गया था। एक बार शहीद जवान के शव में बम ट्रांसप्लांट करने की घटना को भी अंजाम दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट भी सैनिकों के रेप के मामले में सरकार को कर चुकी है तलब, पढ़िए जनसत्ता की 19 अप्रेल को छपी खबर-

ये रहा लिंक- http://bit.ly/2tfYtfS 

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में हुए तीन कथित बलात्कार के मामलों की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) से कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने मंगलवार को सेना की खिंचाई करते हुए पूछा कि उसने मणिपुर में अपने कर्मियों के खिलाफ रेप और हत्या के आरोपों पर चुप्पी क्यों साधे रखी। सुप्रीम कोर्ट जवानों के खिलाफ मामला आगे नहीं बढ़ाने के लिए राज्य सरकार से भी खिचाई की। कोर्ट ने मणिपुर सरकार से पूछा कि यह उनकी लाचारी थी या फिर मौन सहमति कि ऐसे आरोपों के बावजूद वह सेना के खिलाफ आगे नहीं बढ़ेगी।

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इसके बाद कोर्ट ने कहा कि हम यह जानना चाहेंगे कि आपने किस तरह की जांच की है। हम जांच रिपोर्ट देखना चाहेंगे। इसके बाद अटॉर्नी जनरल ने कहा कि राज्य सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया था, लेकिन उसे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था।

मणिपुर की महिलाओं नेे असम राइफल्स के खिलाफ किया था नग्न प्रदर्शन

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई चल रही है। इसमें मणिपुर में 2000 से 2012 तक के बीच सुरक्षा बलों और पुलिस द्वारा 1528 बलात्कार और हत्या से जुड़े मामले चल रहे है। इस याचिका में सभी मामलों में निस्पक्ष जांच और मुआवजे की मांग की गई है।

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तीन माामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठित करने का दिया है आदेश- 

बता दें कि जिन तीन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है उनमें भारतीय सेना और अर्ध-सैनिक बल और असम राइफल्स के जवान आरोपी हैं। पहला मामला 4 अक्टूबर 2003 को पेश आया था जिसमें एक 13 साल की बच्ची का दो जवानों ने कथित तौर पर बलात्करा किया था। बलात्कार के बाद पीड़िता ने आत्महत्या कर ली थी।

अन्य दो मामलों में मणिपुरी लड़कियां टी. मनोरमा और एल.डी. रेंगतुईवान की साल 2004 में प्रताड़ना और हिरासत में मौत हो गई थी। उल्लेखनीय है कि मनोरमा मामला राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में रहा है।

कोर्ट ने कहा, “यहां एक 13 साल की लड़की जो रबर फार्म में काम करती थी, उसके खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं है कि वो घुसपैठिया थी। दो लोग आते हैं और उसका रेप करते हैं। वो अपनी मां और बहन से आपबीती बताती है और फिर आत्महत्या कर लेती है। क्या आपने ये तय कर लिया है कि सेना को आने दो और किसी का भी रेप करने दो.

तो ऐसे में सवाल उठता है कि जब सुप्रीम कोर्ट तक ने सेना के जवानों द्वारा अपने ही देश के नागरिक महिलाओं का बलात्कार करने पर सवाल उठाएं हैं तो फिर आजम खां ने ऐसा क्या गलत कह दिया जिस कारण से विश्व हिंदू परिषद के नेता आजम खां की जुबान  कटवा रहे हैं और मीडिया को दिनभर चलाने के लिए मसाला मिल गया है.

सेना द्वारा बलात्कार किए जाने वाले मामले से जुड़े इस लिंक को भी पढ़ें…

http://www.prabhatkhabar.com/news/aalekh/story/192692.html

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