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कठघरे में सुप्रीम कोर्ट ! जस्टिस चेलमेश्वर ने सुनवाई से किया इनकार, बोले 24 घंटे में बदल जाएगा मेरा फैसला

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।  

न्यायिक सिस्टम मे फैले जातिवाद, परिवारवाद, वंशवाद और भ्रष्टाचार पर दबी जुबान लोग सवाल उठाते रहे हैं लेकिन न्यायिक अवमानना के डर से आम आदमी या पत्रकार सीधे तौर पर उस पर सवाल उठाने से बचते रहे हैं।

लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत के चार वरिष्ठ जजों की प्रेस कांफ्रेस के बाद ये चर्चा खास से लेक आम आदमी तक पहुंच गई कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक सिस्टम में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा।

जजों की वरिष्ठता दरकिनार करते हुए कुछ केसों को अपने रिश्तेदारों या चहेते जजों की बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा भेजा जा रहा है। इतिहास में ये पहला मौका था जब एक साथ वरिष्ठ जजों ने सीधे चीफ जस्टिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिए थे।

अब एक जनहति याचिका की सुनवाई से इनकार करके उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।

पूर्व कानून मंत्री ने डाली थी याचिका- 

उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे चेलमेश्चर ने शीर्ष अदालत में बनी परिस्थितयों पर गुरुवार को फिर पीड़ा व्यक्त की और पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की मामलों के आवंटन संबंधी दिशा-निर्देश बनाने की मांग करने वाली जनहित यचिका की सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

जब पिता की जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया गया तो वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अदालत में पहुंचे, वहां मामले का जिक्र किया और इसे जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हम इस पर गौर करेंगे.’

जस्टिस चेलमेश्वर ने जताई असमर्थता- 

प्रशांत भूषण ने पहले इस मामले का जिक्र न्यायामूर्ति चेलमेश्वर के समक्ष किया था और कहा था कि यह आपात स्थिति है. उन्होंने कहा कि वह इस मामले का जिक्र न्यायमूर्ति चेलमेश्वर की पीठ के समक्ष कर रहे हैं क्योंकि जनहित याचिका ‘मास्टर ऑफ रोस्टर सिद्धांत’ को चुनौती देती है और इसकी सुनवाई प्रधान न्यायाधीश नहीं कर सकते हैं.

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा कि इसके कारण बिलकुल स्पष्ट हैं और वह इस मामले की सुनवाई नहीं करना चाहते. उनकी यह टिप्पणी उनके और न्यायामूर्ति कुरियन जोसफ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के मामलों और न्यायिक मामलों में कार्यपालिका के हस्तक्षेप को लेकर हाल में लिखे गए दो पत्रों की पृष्ठभूमि में आई है.

जस्टिस की महत्वपूर्ण टिप्पणी- 

जस्टिस चेलमेश्वर ने भूषण से कहा, ‘ कोई मेरे खिलाफ लगातार यह अभियान चला रहा है कि मैं कुछ हासिल करना चाहता हूं. इस बारे में मैं ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. मुझे खेद है, आप कृपया मेरी परेशानी समझिए.’

उन्होंने कहा कि देश सब कुछ समझ जाएगा और अपनी राह खुद तय करेगा. उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि अगले 24 घंटे में एक बार फिर मेरे आदेश को पलटा जाए. इसलिए मैं यह नहीं कर सकता. कृपया मेरी परेशानी समझिए.’

मामला बीते आठ अप्रैल को तब खुला था जब कथित बलात्कार पीड़िता ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की. उसका आरोप था कि पुलिस भाजपा विधायक के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं कर रही है.

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