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अब स्वामी चिन्मयानंद से रेप केस हटाएगी ‘रामराज’ का दावा करने वाली योगी सरकार, लोगों ने उठाए सवाल

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ खुद के और अपने उपमुख्यमंत्री केशव मौर्या के ऊपर लगे मुकदमों को वापस लेने का आदेश पहले ही दे चुके हैं अब उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए मित्रता निभाने की पहल की है।

अब उत्तर प्रदेश में रामराज्य लाने का दावा करने वाली योगी आदित्यनाथ सरकार ने पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज दुष्कर्म का केस वापस लेने का फैसला लिया है।

ये खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैली। सोशल मीडिया पर खबर फैलते ही यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रियाएं देने शुरू करते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। कुछ यूजर्स ने तो यहां तक कहा कि अब स्वामी चिन्मयानंद को भी मंत्री बना दो और खुद जज बन जाओ योगी जी।

क्या है मामला- 

उत्‍तर प्रदेश सरकार ने पूर्व केंद्रीय गृह राज्‍य मंत्री और मुमुक्षु आश्रम के प्रमुख स्‍वामी चिन्‍मयानंद पर दर्ज बलात्‍कार का मुकदमा वापस लेने का फैसला किया है। पत्र नौ मार्च, 2018 को जिला मजिस्‍ट्रेट, शाहजहांपुर के कार्यालय से जारी हो चुका है।

वरिष्‍ठ अभियोजन अधिकारी को संबोधित पत्र एडीएम (प्रशासन) के दस्‍तखत से जारी हुआ है। उसी दिन सक्षम अधिकारी को इस पर अमल के लिए भी लिख दिया गया है।

पत्र में लिखा गया है कि शासन ने शाहजहांपुर कोतवाली में स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज धारा-376,506 आईपीसी का केस वापस लिए जाने का फैसला हुआ है। अतः शासनादेश के तहत कार्रवाई से अवगत कराने का कष्ट करें, ताकि शासन को भी अवगत कराया जा सके।

सीएम गए थे आश्रम-

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 25 फरवरी को शाहजहांपुर गए थे। वहां उन्‍होंने स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम में आयोजित मुमुक्ष युवा महोत्सव में भाग लिया था। तीन मार्च को स्वामी चिन्मयानंद के जन्‍मदिन पर भी कई महत्‍वपूर्ण लोग बधाई देने आश्रम गए थे।

इनमें कई वरिष्‍ठ अफसर भी शामिल थे। इस दौरान स्‍वामी के समर्थकों ने उनकी आरती भी उतारी थी। कार्यक्रम का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें शाहजहांपुर के एडीएम (प्रशासन) जितेंद्र शर्मा भी स्‍वामी की आरती उतारते देखे जा सकते हैं। इसके छह दिन बाद ही शर्मा के ही दस्‍तखत से जारी पत्र में मुकदमा वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए।

सात साल पुराना है रेप केस- 

जौनपुर से सांसद बनने के बाद स्वामी चिन्मयानंद वाजपेयी सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री थे। इस दौरान उनके संपर्क में आईं बदायूं निवासी साध्वी चिदर्पिता नामक महिला ने 2011 में उन पर हरिद्वार के आश्रम में बंधक बनाकर दुष्कर्म का आरोप लगाया था।

चिदर्पिता की तहरीर पर स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ शाहजहांपुर कोतवाली में 30 नवंबर 2011 को दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज किया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर स्टे दिया था। तब से केस लंबित चला आ रहा है। स्वामी चिन्मयानंद के करीबियों के मुताबिक राजनीतिक साजिश और छवि खराब करने के मकसद से उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया था।

जनता ने उठाए सवाल- 

रिटायर्ड आईपीएस अफसर महेश चंद्र द्विवेदी ने इस मुद्दे पर फेसबुक पर लिखा,”आज शाहजहांपुर के स्वामी चिन्मयानंद के विरुद्ध सात साल से कचहरी में चल रहे बलात्कार के मुकदमे को शासन द्वारा वापस लेने की खबर पढ़कर घोर निराशा एवं चिंता हुई।

समाचारों के अनुसार हाल में अन्य अनेक मुकदमे भी वापस लिये गये हैं। निराशा इसलिये हुई कि मुकदमो के तथ्य चाहे जो भी हो, स्वच्छता का दम भरने वाले शासन की छवि पर यह कृत्य दाग़ लगाता है। चिंता इसलिये हुई कि मुकदमा-वापसी का यह हथियार भविष्य में सम्पूर्ण न्यायिक प्रक्रिया को ध्वस्त कर सकता है. ..
समय आ गया है मुकदमा वापसी का प्राविधान ही समाप्त कर दिया जाये।”

परवेज आलम ने लिखा-योगी की मेहनत रंग लाई, अपने ऊपर के अपराध के आरोपों के साथ अपने मित्रों के अपराध भी हटा रहे, यही तो रामराज है।

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