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गुजरात: जाति से ऊपर नहीं उठ पाई देशभक्ति, दलित सरपंच को झंडा फहराने से रोका, मामला दर्ज

नई दिल्ली/गुजरात। नेशनल जनमत ब्यूरो 

15 अगस्त को जब लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की एकता एवं अखंडता की बात करके देशवासियों को झूठे आंकड़े बता रहे थे। उसी समय आजादी के 70 वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनके ही गृह राज्य गुजरात में एक सरपंच जातिगत भेदभाव का सामना कर रहे थे।

घटना गुजरात के राजकोट जिले के गोंडल तालुका गांव की है। जहां डिप्टी सरपंच के पति ने दलित सरपंच को इसलिए झंडा नहीं फहराने दिया कि वह दलित है। इस घटना से क्षुब्ध गोंडल तालुका के सरपंच प्रेमजी जोगल की शिकायत पर गोंडल पुलिस ने उपसरपंच के पति राजेश साखिया के ख़िलाफ़ आपराधिक धमकी व अनसूचित जाति/जनजाति एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

शिकायत में सरपंच प्रेमजी जोगल ने कहा कि गांव के प्राइमरी स्कूल में 15 अगस्त पर होने वाले ध्वजारोहण समारोह से ठीक पहले डिप्टी सरपंच के पति ने उन्हें झंडा फहराने से रोक दिया।

सरपंच ने आगे कहा “राजेश ने मुझसे कहा कि मैं तिरंगा नहीं फहरा सकता क्योंकि मैं दलित हूं। उसने कहा कि अगर मैने झंडा फहराया तो यह अशुद्ध हो जाएगा।” सरपंच ने दावा किया कि उसे मंच की कुर्सी पर ही वापस बैठा दिया गया।

प्रेमजी जोगल ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए आगे कहा “समारोह शुरू होने से पहले ही राजेश ने मुझे धमकी देते हुए कहा कि या तो कुर्सी पर ही बैठा रहूं नहीं तो इसे भी खो दूंगा।” राजेश की पत्नी का नाम तृषा है जो गांव की उपसरपंच है।

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