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तुम सवाल से डरते हो, हमें मौत से डर नहीं… क्या यही वजह है मेरे कत्ल की…

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो नरेंद्र दाभोलकर, कलबुर्गी, पनसारे……. अब गौरी लंकेश। व्यवस्था के नकारेपन के खिलाफ जनता को जागरूक करने वाले लेखकों, पत्रकारों, कलमकारों की आवाज खामोश की जा रही है। इन बेबाक आवाजों का गुनाह सिर्फ इतना है कि ये साम्प्रदायिकता एवं फासीवाद के खिलाफ लिखते थे। आखिर सवाल से इतनी बौखलाहट? सवाल से इतनी झल्लाहट? जम्हूरियत को…

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