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आरक्षण का लाभ लेने वाले पिछड़े, क्षत्रिय बनकर, मनुवादियों के खिलाफ संघर्ष को कमजोर कर रहे हैं

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।   पिछड़े तबके के साथ एक सबसे बड़ी समस्या उसका पहचान का संकट है। थोड़ा बहुत पैसा कमाकर ही ओबीसी का कोई व्यक्ति खुद को अपनी मूल पहचान से अलग करने की कोशिश करता है। हालांकि वह ये भी चाहता है कि उसके बेटे को ओबीसी होने का लाभ मिले लेकिन खुद ओबीसी की अपनी…

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सावधान ! आपके महापुरुष चुराकर, आपको छला जा रहा है, संगठित रहिए …

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कहा था कि अगर आज बाबा साहब न होते तो नरेंद्र मोदी कहां होते ? अगर इन्ही पीएम के राज में आरक्षण खत्म किया जा रहा है तो जाहिर है पीएम का यह बोलना बीजेपी और संघ का एजेंडा ही माना जाएगा,…

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अंधविश्वास और जातिवाद से लबरेज इस देश को ‘छुआछूत, दंगा और बाबा म्यूजियम’ चाहिए !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।   जर्मनी और रवांडा जैसे कुछ अफ्रीकी देशों में कई सारे होलोकॉस्ट म्यूजियम हैं स्कूल कॉलेज के बच्चों को वहां दिखाया जाता है कि हिटलर के दौर में या हुतु तुत्सी जातीय हिंसा के दौर में किस नंगई का नाच हुआ था, कैसे पढ़े लिखे समझदार लोग जानवर बन गए थे और एकदूसरे की खाल…

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जहरीले वेदांत, गुलाम मानसिकता और अध्यात्म का मुकाबला सिर्फ नास्तिकता ही कर सकती है

नई दिल्ली. नेशनल जनमत ब्यूरो।  डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को रेप केस में 10 साल की सज़ा मिलने के बाद बाबाओं के प्रति लोगों का भरोसा उठने लगा है। राम रहीम से पहले भी कई ऐसे बाबा थे जो ईश्वर के नाम पर पर्दे के पीछे सेक्स रैकेट चलाते थे। इस वेदांत और अध्यात्म से दूर रहने में…

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कब समझोगे? धर्म, अध्यात्म, आत्मा-परमात्मा, पुनर्जन्म, मोक्ष सब बाबाओं के धन उगाहने के साधन हैं

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।  हरियाणा में शुक्रवार को कोर्ट द्वारा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद पूरे देश में हिंसा का माहौल है। बाबा राम रहीम के समर्थकों ने की हिंसा अब तक 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बाबा को दोषी करार दिए जाने के…

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बाबा साहेब के विचारों को समझे बगैर उनको पूजने लगना ब्राह्मणवाद की पुनर्स्थापना करना है

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।  संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की सोशल मीडिया फेसबुक पर एक ऐसी तस्वीर पोस्ट की गई है जिसमें कुछ लोग उनकी पूजा-अर्चना कर रहे है। यह फोटो सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रही है। जाने-माने अंतर्राष्ट्रीय शोधार्थी और सामाजिक कार्यकर्ता संजय श्रमन जोठे ने इस तस्वीर पर ऐतराज जताया है। उनका कहना है…

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मत भूलिए काल्पनिक सत्ता के सामने सर झुकाकर आप इन धूर्तों और गुंडों को असीम ताकत दे रहे हैं !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो  देश में बन रहे छद्म माहौल ने सदियों से चली आ रही मानसिक गुलामी को और ताकत प्रदान कर दी है। इस माहौल में वास्तविकता कल्पना से परे होती जा रही है और कल्पना को वास्तविकता का जामा पहना दिया गया है। अंधविश्वास को घटाने की बजाए भगवा सरकारें उनको बढ़ाने पर जोर दे रही…

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वंचित तबके के नेता और धनपति अपनी कौम के लिए गद्दार हो गए हैं, पहल हमें करनी होगी

नई दिल्ली। संजय श्रमण जोठे (नेशनल जनमत)  भारत के दलितों आदिवासियों, ओबीसी (शूद्रों) और मुसलमानों को मानविकी, भाषा, समाजशास्त्र, दर्शन इतिहास, कानून आदि विषयों को गहराई से पढने/पढाने की जरूरत है. कोरा विज्ञान, मेडिसिन, मेनेजमेंट और तकनीक आदि सीखकर आप सिर्फ बेहतर गुलाम या धनपशु ही बन सकते हैं, अपना मालिक और अपनी कौम के भविष्य का निर्माता बनने के…

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बुद्धि का ठेका रखने वालों ने हमेशा से खुद अपनी चोटियां लंबी कीं और दूसरों की चोटी काटी है

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो  मुंहनोचवा और चोटीकटवा जैसी अफवाहें फैलाकर पंडे-पुरोहित और सरकार की गोद में बैठे पोगापंथी बीच-बीच में ये जांचने की कोशिश करते हैं कि अब इस देश की जनता का मानसिक स्तर कहां तक पहुंचा है। इस भ्रम जाल को बनाकर देश के जरूरी मुद्दों को पीछे छोड़ने के लिए जातिवादी सवर्ण मीडिया उनका साथ देता…

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तकनीक के ‘बाबू’ देश के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं , ये पीढ़ी चलताऊ राष्ट्रवाद की सबसे आसान शिकार है

नई दिल्ली। संजय श्रमण जोठे ( नेशनल जनमत)  भारत में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट. मेडिसिन या तकनीक की अकेली पढाई पूरी कौम और संस्कृति के लिए कितनी घातक हो सकती है ये साफ नजर आ रहा है। इस श्रेणी के भारतीय युवाओं में समाज, संस्कृति, साहित्य, इतिहास, धर्म की अकादमिक समझ लगभग शून्य बना दी गयी है। ये तकनीक के “बाबू” देश…

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