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महागठबंधन हिमालय की तरह मजबूत-अटूट है, बीजेपी समर्थित मीडिया इसे पचा नहीं पा रहा है-तेजस्वी

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

महागठबंधन को लेकर चल रही बयानबाजी और मीडिया की खुद को खुश करने के लिए छापी जा रही खबरों के बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मीडिया पर बड़ा हमला बोला है.  अपने फेसबुक वॉल पर मीडियो को बीजेपी समर्थित बोलते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया महागठबंधन को पचा नही पा रहा है. हमारे नेताओं में बेहतर समन्वय है.

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महागठबंधन में आपसी सामंजस्य है-

महागठबंधन के शीर्ष नेताओं में बेहतर समन्वय है. बिहार की न्यायप्रिय जनता ने महागठबंधन की नीतियों और कार्यक्रमों को अपार समर्थन एवम अनंत सम्मान देकर ऐतिहासिक बहुमत दिया है. हमारा इस बहुमत के पीछे जनता के सरोकारों के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रतिबध्ह्ता है. बीजेपी और उनके समर्थक संस्थानों को हमारी एकता हजम नहीं हो रही है.गठबंधन के भी कुछ नेता व्यक्तिगत हितों को लेकर अनावश्यक बयानबाजी करते रहते है ताकि खबरों में बने रहे.

भाजपा समर्थित मीडिया दुष्प्रचार में लगा है- 

भाजपा समर्थित मीडिया का भी एक वर्ग जिस दिन से महागठबंधन बना है उसी दिन से महागठबंधन के खिलाफ दुष्प्रचार में लगा हुआ है. शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब उन्होंने यह रिपोर्ट किया हो कि महागठबंधन मजबूत है, एकजुट है और बिहार के लिए समर्पित है. शायद वो इसलिए नहीं करते क्योंकि महागठबंधन का विचार उनके सरोकारों को पूर्ण नहीं करता. महागठबंधन के बने रहने की इसी बैचनी और टूटने के ख्याली पुलाव खाने की बेकरारी में वो अपनी उर्जा का निवेश करते रहते है| खैर सबकी पेशागत मजबूरियां या वैचारिक मान्यताएं होती हैं और लोकतंत्र में इसका भी सम्मान होना चाहिए.

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हर दल  में स्वार्थी किस्म के लोग होते हैं- 

हर दल में कुछ ऐसे व्यक्ति होते है जो मैंडेट या जनभावना का समर्थन ना करके अपने निजी हितों को सर्वोपरि रखते है| ऐसे लोगों की अपनी व्यक्तिगत धारणाएँ और पीड़ाएं होती है जिन्हें वे मीडिया के मार्फत दल और गठबंधन से जोड़ देते है| लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं है| मीडिया में किसी दल का मंतव्य केवल उसके आधिकारिक प्रवक्ता ही दे सकते है.

मीडिया वाले अपने मन से बुला लेते हैं प्रवक्ताओं को- 

बाकायदा हमारे दल की तरफ से सभी मीडिया प्रतिष्ठानों को प्रदेश अध्यक्ष की तरफ से चिट्ठी भी कई बार भेजी जा चुकी है जिसमें स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि केवल नामित प्रवक्ता ही पार्टी से सम्बद्ध मसलों पर आधिकारिक बयान देने के लिए अधिकृत है लेकिन फिर भी उस निवेदन और सूचना का पालन उनके द्वारा नहीं किया जाता और वो अपने पसंद के अनाधिकृत व्यक्ति से बयान लेकर उसे पार्टी का आधिकारिक बयान बताकर चला देते है|

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मीडिया मिर्च- मसाला लगाकर चलाते हैं खबर- 

समर्थित मीडिया को भी मिर्च-मसाला चाहिए होता है इसलिए ऐसे व्यक्ति का बयान चलाते है जो पार्टी की तरफ से बोलने के लिए नामित नहीं है. कुछ ऐसे लोगों पर पार्टी की तरफ से अनुशासनात्मक कार्यवाई हुई है और आगे से कोई उल्लघंन करेगा तो उस पर भी कार्यवाई होगी. हम भले ही मास पार्टी है लेकिन अनुशासन से कोई समझौता नहीं करेंगे और किसी के निजी मंतव्य और हित को पार्टी के मत से जोड़ने की चेष्ठा करने वाले पर कार्यवाई करेंगे.

गठबंधन पर बयान देने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष का है ना कि किसी विधायक का या और किसी अन्य नेता का. किसी भी सूरत में गठबंधन से सम्बद्ध मामला तीनों पार्टीयों के राष्ट्रीय अध्यक्षों का मसला है इसलिए उस पर किसी प्रकार की टिप्पणी करना शोभनीय नहीं है| अगर किसी को किसी प्रकार की परेशानी है तो सम्बंधित प्लेटफॉर्म पर ही उसकी बात की जानी चाहिए ना की मीडिया के द्वारा. हम इसे लेकर अत्यंत गंभीर है.

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हिमालय की तरह अटूट है महागठबंधन- 

मैंने कल ही कहा था महागठबंधन हिमालय की तरह मजबूत और अटूट है. बिहार जीतने की भाजपाई मंशा कतई पूरी नहीं होने वाली है. बिहार का महागठबंधन तो देश की वर्तमान राजनीति का सबसे सुनहरा एवम सकारात्मक अध्याय है. इसी महागठबंधन की देन है कि नवंबर 2015 से लेकर मार्च 2017 तक देश अमन चैन और भाईचारे से जी रहा था अन्यथा यूपी चुनाव के बाद से तो पूरा देश अराजकता और दहशत के माहौल में ही जी रहा है. कब तीन लोगों का झुंड किस व्यक्ति को धर्म, भोजन, पहनावे या छद्म राष्ट्रवाद के नाम पर मार दें कौन जानता है?

बीजेपी प्रायोजित भीड़ ने लोकतंत्र को डरतंत्र में तब्दील कर दिया है. इसलिए पुरे देश के क्षेत्रीय दलों पर वहां की न्यायप्रिय व अमनपसंद जनता का भी दबाब है कि वो बिहार की तरह महागठबंधन करें और देश तोड़ने वाली फासिस्ट ताकतों को परास्त करें. जो लोग महागठबंधन टूटने की आशा कर रहे है उनके लिए इतना ही कहना है की यह सपना पूरा नहीं होने वाला है. 2019 में बीजेपी को हराने में महागठबंधन की सबसे अहम भूमिका होगी. देश और संविधान बचाने के लिए हम सभी समतावादी और समाजवादी दलों को एकसाथ लाने का प्रयास कर रहे है.

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