योगीराज: पीएम की काशी में 24 थानों में 23 सवर्ण थानाध्यक्ष, दलित पिछड़े गायब, लिस्ट देखें

वाराणसी। नेशनल जनमत ब्यूरो।

चुनाव के समय तो पीएम मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी खूब नारा दिया करते थे, सबका साथ सबका विकास. पर जैसे ही भाजपा यूपी की सत्ता पर काबिज हुई सबका साथ , सबका विकास का नारा हवा में गायब हो गया.

वाराणसी के थानों का हाल- 

24 थाने 

ओबीसी- 0, एससी- 0, एसटी- 0 मुस्लिम- 1

सवर्ण- 23

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ओबीसी -एससी नजरअंदाज- 

बनारस में भी लखनऊ के थानों की ही तरह ब्राह्मण और ठाकुर जाति के थानेदार बैठा दिए गए हैं. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी कुल 23 थानों में से सभी थानों पर ब्राह्मण औऱ ठाकुर जाति के थानेदार बैठा दिए गए. यूपी चुनाव में भाजपा को वोट देने वाली  कुशवाहा ,पटेल, मौर्या, राजभर, लोध, केवट, चौरसिया, विश्वकर्मा, सुनार, लोहार,कुम्हार,तेली, आदि पिछड़ी जातियां भाजपा सरकार आते ही शासन-प्रशासन से पूरी तरह गायब हो गईं.

पर जब मलाईदार जगह पर पोस्टिंग की बात आई तो ब्राह्मण औऱ ठाकुर अधिकारियों में मची होड़ देखकर पिछड़ी जाति के अधिकारी धीरे से किनारे हो गए. यही हाल तथाकथित रूप से बीजेपी को वोट देने वाली पासी, धोबी, कोरी और बाल्मीकि जैसी दलित जातियों का भी है. ऐसे में भाजपा समर्थक रही दलित और पिछड़ी जातियों के अधिकारियों में भाजपा सरकार को लेकर गहरी निराशा पनप रही है.

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ये रही वाराणसी के थानों में तैनात थानेदारों की लिस्ट

शहर कोतवाली – राजेश सिंह

आदमपुर – शेषनाथ सिंह

राम नगर – राजीव सिंह

महिला थाना – सरोज सिंह

चौक    – अशोक सिंह

दशाश्मेघ – राहुल शुक्ला

लक्सा  – विनोद मिश्रा

चेतगंज  – राजीव रंजन

जैतपुर  –  संजीव मिश्रा

सिंगरा   – गोपाल गुप्ता

भेलूपुर  – राजीव कुमार सिंह

लंका  – देवेन्द्र सिंह

मडुआडीह  – आशुतोष कुमार तिवारी

सारनाथ   –  अखिलेश मिश्रा

शिवपुर   – शिवानंद मिश्रा

मिर्जामुराद   –  संतोष सिंह

कपसेठी   –   श्रीराम सिंह

बड़ागांव   –  दिलीप सिहं

रोहनियां   – क्षितिज तिवारी

लोहता   – श्याम शुक्ला

जंसा   – संतोष कुमार राय

फूलपुर   –   अनिल कुमार सिंह

चौबेपुर  – कुलदीप दुबे

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सवर्णवाद की शुरुआत राजधानी लखनऊ से ही-

थाने- 47, ओबीसी- 1, एससी-0, मुस्लिम-0 सवर्ण- 46

यूपी की राजधानी लखनऊ में पूरी तरह से ब्राह्मण और ठाकुर बिरादरी के थानेदारों को बैठा दिया गया है. हालत ये है कि सिर्फ एक थाने में ओबीसी थानेदार है, बाकी भाजपा को वोट करने वाली कुर्मी, कोयरी, लोधी, चौरसिया, लोहार, सुनार, विश्वकर्मा, पासी, धोबी, कोरी आदि जातियों के थानाध्यक्ष पूरी तरह से नदारद हैं. दलित और मुसलमान समुदाय का कोई भी थानेदार लखनऊ में तैनात नही हैं. आप खुद लिस्ट देंखें और तय करें

ये रही लखनऊ के थानेदारों की लिस्ट….

राजकुमार सिंह- हुसैनगंज
अखिलेश पाण्डेय- गुडम्बा
आशुतोष त्रिपाठी- आलमबाग
अरुण मिश्रा-गौतमपल्ली
सतीश सिन्हा इस्पेक्टर हसनगंज
विजय सेन सिंह- ताटकटोरा
शशीकांत यादव- ठाकुरगंज
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह-अलीगंज
राघवन कुमार सिंह- मडियांव
अजय त्रिपाठी- गोमतीनगर
अक्षय कुमार- इटौंजा
उदयवीर सिंह- बीकेटी
केके मिश्रा- निगोहा
ब्रिजेश राय- पीजीआई
यशकांत सिंह- काकोरी
संतोष कुमार सिंह- नगराम
सीबी सिंह- जानकीपुरम
अंजनी पाण्डेय- चिनहट
अरुण कुमार सिंह- पीआरओ प्रेस बनाये गये

ये तो सिर्फ चंद नाम है यही हकीकत लखनऊ के अन्य थानों की भी है.

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जालौन के 19 थानों में से 10 थानाध्यक्ष ब्राह्मण-

जालौन जिले में 19 थाने हैं जिनमें एसपी स्वपनिल ममगई ने स्वजातीय ब्राह्मण थानेदारोंं को हर जगह बैठा दिया है. आलन ये है बीजेपी सरकार आते ही अचानक से काबिल होते हुए 19 में से 11 थानों की कमान केवल ब्राह्मण जाति के थानेदारों को दे दी गई.

पूरे प्रदेश की कमोबेश यही स्थिति है-

लखनऊ ही नहीं इलाहाबाद, कानपुर मिर्जापुर,गोरखपुर,झांसी, मुरादाबाद, मेरठ, रामपुर, वाराणसी, बरेली, आजमगढ़ जैसे जिलों के थानों में ज्यादातर ब्राह्मण या ठाकुर बिरादरी के थानेदार ही बैठा दिए गए है. सपा सरकार के समय यूपी के थानों में यादव जाति के थानेदारों की खबर मीडिया में छाई रहती थी. चुनाव के समय भाजपा ने इसे चुनावी मुद्दा भी बनाया था.पर आज पिछड़ी जातियों के अधिकारियों में भाजपा सरकार की भेदभावपूर्ण नीति से पटेल, कुशवाहा, लोध, पासी, निषाद, विश्वकर्मा, धोबी, कोरी जैसी सशक्त पिछड़ी औऱ दलित जाति के अधिकारियों में गहरी निराशा है.

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