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हौसले को सलाम: ट्रांसफर पर योगी सरकार को करारा जवाब दिया डिप्टी एसपी श्रेष्ठा ठाकुर ने

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

सरकार का मुखिया योगाचार्य ही क्यों ना हो, सरकार बदलती है तो केवल झंडे का रंग और चेहरे बदलते हैं बाकी सरकार में शामिल नेताओं की दबंगई अमूमन एक सी रहती है. चाल-चरित्र और चेहरे की बात करने वाली बीजेपी की उ.प्र. में सरकार बनते ही भगवाधारियों ने गुंडई और दबंगई दिखाना शुरू कर दिया है। हद तो ये है कि सरकार भी अधिकारियों पर कार्रवाई करके बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था को और बिगाड़ने पर तुली हुई है।

लेकिन श्रेष्ठा ठाकुर जैसे पुलिस अधिकारियों का हौसला ही है जो कानून व्यवस्था को संभाल के रखता है। धमकी देने वाले बीजेपी नेताओं को जेल भेजा तो सीएम ने सीओ श्रेष्ठा ठाकुर का तबादला नेपाल बार्डर से सटे बहराइच कर दिया। इस पर श्रेष्ठा ठाकुर ने भी अपने फेसबुक पर सरकार को अपने कॉलर ऊंची करने वाले बुलंदशहर के बीजेपी नेताओं को करारा जवाब  दिया है।

आप खुद पढ़िए क्या लिखा है श्रेष्ठा ठाकुर ने अपने फेसबुक वॉल पर- 

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पुलिस से बदतमीजी के आरोप में भेजा था जेल-

ठाकुर ने एक हफ्ते पहले स्थानीय बीजेपी नेता और अन्य पांच नेताओं को पुलिस कार्रवाई में दखल देने और पुलिस अधिकारी से बदतमीजी करने के आरोप में जेल भेज दिया था। ठाकुर के तबादले के बाद स्थानीय नेता इसे अपना सम्मान मान रहे हैं और इसके साथ ही आला अधिकारियों से महिला अफसर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। बुलंदशहर के बीजेपी अध्यक्ष मुकेश भारद्वाज ने कहा कि ठाकुर पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और अन्य नेताओं पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का मामला दर्ज कराया गया है।

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गाड़ी का चालान काटने पर हुआ था विवाद-

तकरीबन एक हफ्ते पहले ट्रैफिक रूल तोड़ने पर पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ता का चालान काट दिया था। इसके बाद अन्य बीजेपी कार्यकर्ताओं ने CO श्रेष्ठा ठाकुर से बदसलूकी की। इतना ही नहीं, जिन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पकड़ा था, उन्हें भी कोर्ट परिसर से छुड़ाने की कोशिश की गई। कार्यकर्ताओं ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी की।

बुलंदशहर जिले के स्याना कस्बे में बीजेपी की जिला पंचायत सदस्य के पति प्रमोद लोधी का ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में पुलिस ने चालान काटा था। चालान काटे जाने के बाद प्रमोद पुलिस से भिड़ गया। बात हाथापई तक पहुंच गई। जिसके बाद पुलिस ने बाइक को सीज कर प्रमोद को गिरफ्तार कर लिया।

कोर्ट परिसर में छुड़ाने पहुंचे थे बीजेपी नेता को-

प्रमोद को जब कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया तब बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता वहां भी पहुंच गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की गई। कार्यकर्ताओं और CO के बीच भी बहस हुई। बीजेपी कार्यकर्ताओं का आरोप था कि पुलिस बीजेपी से जुड़े ही लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है और ट्रैफिक नियमों के नाम पर घूसखोरी की जाती है।

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