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जातिवाद: UP के नौकरशाहों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की जिम्मेदारी सिर्फ ब्राह्मण ऑफीसर्स के हवाले !

नई दिल्ली। ( नेशनल जनमत की विशेष पड़ताल ) 

उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार को जातिवादी कहकर मंचों से सबका साथ,  सबका विकास का  ढिढोरा पीटने वाली बीजेपी सरकार में जातिवाद का खुला खेल शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश में अजय सिंह बिष्ट उर्फ आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनते ही अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में  ब्राह्मणवाद और ठाकुरवाद का हावी होता जा रहा है।

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ऐसा लगता है कि सभी मलाईदार पद और जिम्मेदारियां दोनों जातियों के बीच ही बांटने की आम सहमति बन गई हो। जहां ब्राह्मण नही वहां ठाकुर जहां ठाकुर नहीं वहां ब्राह्मण। हैरत की बात तो ये है कि जिन ठाकुर-ब्राह्मण अधिकारियों ने अखिलेश सरकार के समय खूब मलाई काटी आज वही अधिकारी सपाई से संघी बनकर जाति का प्रत्यक्ष उठाते दिख रहे हैं।

प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विभाग में से एक नियुक्ति में जातिवाद का खुला खेल- 

अब हम आपको बता रहे प्रदेश के आईएसएस और पीसीएस जैसे महत्वपूर्ण अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के साथ ही प्रमोशन क लिए वरिष्ठता की सूची तैयार कने की जिम्मेदारी संभालने वाले नियुक्ति विभाग की । शासन ने पूरे प्रदेश के नौकरशाहों को तैनात करने की जिम्मेदारी देखिए कैसे एक जाति के कंधे पर डाल रखी है।

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नियुक्ति विभाग का खुला खेल देखिए- 

प्रमुख सचिव- दीपक त्रिवेदी

विशेष सचिव- उदयभान त्रिपाठी

संयुक्त सचिव- धनंजय शुक्ला

सेक्शन ऑफीसर में भी ब्राह्मण अधिकारियों का बोलबाला- 

9 सेक्शन ऑफीसर यानि अनुभाग अधिकारी तैनात हैं, नियुक्ति विभाग में. जो अलग-अलग पदों के हिसाब से आईएसएस-पीसीएस अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की सूची बनाकर विशेष सचिव और प्रमुख सचिव तक पहुंचाते हैं।

9 अधिकारियों में से  4 ब्राह्मण, 3 ठाकुर, 1 ओबीसी, 1 एससी

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सेक्शन 1– प्रवीण कुमार सिंह -ठाकुर

सेक्शन- 2– अरुण दुबे- ब्राह्मण

सेक्शन-3– देवेश मिश्रा- ब्राह्मण

सेक्शन-4– अारपी सिंह- ठाकुर

सेक्शन-5– निर्मेष शुक्ला – ब्राह्मण

सेक्शन- 6- जूही दुबे – ब्राह्मण

सेक्शन- 7– दीपक पटेल – कुर्मी ओबीसी

सेक्शन- 8– पुष्पेन्द्र सिंह- ठाकुर

सेक्शन- 9- शिव प्रसाद- एससी

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ठाकुर अधिकारियों का भी जलवा कम नहीं- यूपी के इतिहास में पहली बार मिली स्थाई तैनाती- 

उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि तीन ठाकुर अधिकारियों का पहले ट्रांसफर हुआ फिर अपने ही आदेश को 29 जून को रद्द करते हुए प्रशासन ने तीनों की 1 साल के लिए स्थाई नियुक्ति का शासनादेश जारी कर दिया। मतलब 1 साल तक उनको खुली छूट दी गई कि कुछ भी करो 1 साल तक तुम्हारा कोई ट्रांसफर नहीं होगा।

अविनाश सिंह नगर आयुक्त कानपुर को एक साल की फिक्स पोस्टिंग के साथ ट्रांसफर रद्द करते हुए नगर आयुक्त कानपुर के पद पर यथावत रखा गया।

सपा सरकार में तीन साल तक एडीएम लखनऊ रहे। बीजेपी आते ही कानपुर नगर आयुक्त के पद पर एक साल तक कोई नहीं छेड़ेगा।

विशाल भारद्वाज अपर निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय लखनऊ से विशेष सचिव नगर विकास विभाग में हुआ तबादला निरस्त करते हुए एक साल के लिए यशावत रखने का आदेश हुआ.

सपा सरकार में तीन साल अपर आयुक्त नगर निगम लखनऊ थे। दो साल से इसी पद पर  जमे हैं।

विजय कुमार सिंह अपर निदेशक सूडा लखनऊ से विशेष सचिव राजस्व विभाग के पद पर किया गया तबादला निरस्त करते हुए 1 साल के लिए यथावत रखा गया।

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सिर्फ कमाऊ और भक्त टाइप के अफसरों का है बोलबाला-

अब ये चर्चा आम हो गई है कि सरकार किसी की भो हो, मुख्यमंत्री कोई भी रहे अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में सिर्फ तीन चीजें देखी जाती हैं।

1- एक तो उसकी जाति

2- वो कितना कमाकर मंत्री जी को खुश रख सकता है.

3- सरकार के रंग के हिसाब से वो कैसे अपनी मानसिकता बदलता है।

अपनी ईमानदारी के कारण जिम्मेदार अधिकारी सभी सरकारों में उपेक्षित ही रहते हैं। नेशनल जनमत ने जब इस बारे में कुछ अधिकारियों का मन टटोला तो ज्यादातर लोगों का मानना था कि काम और आपकी काबिलियत कोई मायने नहीं रखती जो इन तीनों फन में माहिर वही सरकार का चहेता है।

जातिवाद के आरोपों से घिरी रही सरकारी वकीलों की नियुक्ति- 

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311  में से अकेले 70 फीसदी ठाकुर-ब्राह्मण- 

इस लिस्ट में स्थायी अधिवक्ता (उच्च न्यायालय), मुख्य स्थाई अधिवक्ता, अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता और ब्रीफ होल्डर (क्रिमिनल) और ब्रीफ होल्डर सिविल के पद हैं। इसमें  311 में से अकेले 216 पद ब्राह्मण 65 पद ठाकुरों के पास हैं। यानि कि अकेले 70 फीसदी पद ठाकुर-ब्राह्मणों के पास हैं। अन्य वर्ग में 20 ओबीसी, 2 एससी और 4 मुसलमानों को इस लिस्ट में जगह दी गई है।

देखिए जातिवाद का खेल-  

4 मुख्य स्थाई अधिवक्ता-  ब्राह्मण- 3

25 अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता-  ब्राह्मण -12, ठाकुर- 7

103 स्थाई अधिवक्ता –   ब्राह्मण- 60, ठाकुर- 17

65 ब्रीफ होल्डर  सिविल-  ब्राह्मण-34,  ठाकुर- 8

114 ब्रीफ होल्डर क्रिमिनल-  ब्राह्मण-42,  ठाकुर-33

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