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हड़तालों की सरकार: GST के विरोध में कल से 80 लाख ट्रकों का चक्का जाम, 13 को 54000 पेट्रोल पंप बंद

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आकस्मिक फैसलों से बीजेपी सरकार हड़तालों की सरकार बनती जा रही है। कभी गुजरात में व्यापारियों का प्रदर्शन तो कभी महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान में किसानों का आंदोलन सरकार की नीतियों के खिलाफ लोगों में गुस्सा पनपता जा रहा है।

इस बार जीएसटी के विरोध में ट्रक मालिकों और पेट्रोल पम्प संचालकों ने देश व्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। कल यानि 9 अक्टूबर से 36 घंटे के लिए ट्रकों के पहिए थम जाएंगे। इन सभी हड़तालों का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

ट्रक मालिकों और संचालकों ने शनिवार को जीएसटी के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नए कर के तहत डीजल को लाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने 36 घंटों के राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया, जो नौ अक्टूबर सुबह आठ बजे से शुरू होगी।

कलकत्ता गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभात कुमार मित्तल ने संवाददाताओं से कहा, “जीएसटी लागू होने के बाद परिवहन व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) और अन्य ट्रासपोर्ट एसोसिएशनों ने दो दिनों की सांकेतिक राष्ट्रीय हड़ताल का आह्वान किया है।

हड़ताल नौ अक्टूबर (सोमवार) को सुबह आठ बजे से शुरू होगी और 10 अक्टूबर को शाम आठ बजे खत्म होगी। हम भी इसका समर्थन करते हैं।” उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत विभिन्न नीतियों के कारण सड़क परिवहन क्षेत्र में बहुत भ्रम और विघटन पैदा हुआ है।

54000 पेट्रोल पंप भी रहेंगे बंद- 

पेट्रोल पंप डीलरों के राष्ट्रव्यापी संगठन फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र पेट्रोल डीलर एसोसिएशन (एफएएमपीईडीए) के अध्यक्ष उदय लोध ने कहा कि संयुक्त पेट्रोलियम मोर्चा की पहली बैठक में निर्णय लिया गया है कि देश भर के करीब 54,000 पेट्रोल पंप अपनी लंबित मांगों के समर्थन में 13 अक्टूबर को दिनभर की हड़ताल पर रहेंगे।

मित्‍तल ने कहा, “डीजल मूल्य में अत्यधिक वृद्धि और कीमतों में रोजाना उतार-चढ़ाव सड़क परिवहन क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। डीजल और टोल पर किया जाने वाला खर्च ट्रक के परिचालन खर्च के 70 फीसदी से भी अधिक है, जबकि डीजल को ही जीएसटी के अंतर्गत नहीं रखा गया है।

डीजल को जीएसटी के अंतगर्त लाना आवश्यक है, ताकि देश में एक कीमत पर डीजल की बिक्री हो।” ट्रांसपोर्टर्स ने यह मांग भी की कि डीजल की कीमतों की समीक्षा तिमाही आधार पर होनी चाहिए।

एआईएमटीसी के कार्यकारी अध्यक्ष एसके मित्तल ने बताया, “वर्तमान परिस्थितियों की जायज चिंताओं और उससे होनेवाली हानि को उजागर करने के लिए यह सांकेतिक हड़ताल की जा रही है। इसमें 80 लाख से अधिक ट्रक शामिल होंगे और सड़क पर नहीं उतरेंगे।” इस प्रस्तावित सांकेतिक हड़ताल के कारण खाद्य पदार्थो सहित विभिन्न वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित रहेगी।

वहीं, लोध का कहना “सभी पेट्रोलियम पदार्थों को अनिवार्य रूप से वस्तु एवं सेवा कर शासन के तहत लाया जाना चाहिए, ताकि हमारी लंबे समय से लंबित ‘एक देश एक कर’ की मांग पूरी हो, जिससे ग्राहकों को फायदा होगा।” उन्होंने जुलाई से लागू दैनिक मूल्य संशोधन ढांचे की समीक्षा की मांग की और कहा कि यह न तो ग्राहकों और न ही डीलरों के लिए फायदेमंद है।

लोध ने कहा, “अगर हमारी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो पहले कदम के तौर पर देश भर के 54,000 पेट्रोल पंप 13 अक्टूबर को खरीद-बिक्री बंद रखेंगे। अगर हमारी मांगें फिर भी नहीं मानी जाती हैं तो हम 27 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे।”

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