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‘नेशनल जनमत’ की खबर का असर, अधीनस्थ सेवा आयोग में अटकी सपा शासन की भर्तियां आगे बढ़ाने का फैसला

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने सपा शासन काल में विज्ञापित पदों पर लंबित भर्तियो को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के लखनऊ पिकप भवन स्थित कार्यालय पर बीते सप्ताह छात्र-छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन किया था।

‘नेशनल जनमत’ ने इस खबर को प्रमुखता से अपनी यू ट्यूब चैनल और वेबसाइट पर प्रकाशित किया था और छात्रों की मांगों को सरकार के कई मंत्रियों तक पहुंचाया था।

अब हजारों छात्र-छात्राओं के लिए लखनऊ से अच्छी खबर आई है। विजिलेंस जांच में फंसी अधीनस्थ की 20,235 भर्तियां जो किसी न किसी स्तर पर अटकी हुई हैं। इन्हे आगे बढ़ाने का फैसला आयोग ने कर लिया है।

अध्यक्ष सीवी पालीवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई आयोग की बैठक में चयन प्रक्रिया को उसकी मौजूदा स्थिति में ही आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

पालीवाल ने बताया की कुछ विज्ञापित पदों पर परीक्षाएं हो चुकी हैं, लेकिन इंटरव्यू नहीं हुए हैं, कुछ में इंटरव्यू हुए थे लेकिन अधूरे हैं। कुछ पदों पर आवेदन लिए गए लेकिन परीक्षा नहीं हुई अब इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

पुलिस ने खदेड़ा था छात्रों को- 

उ.प्र. अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के प्रतियोगी छात्रों ने पिछली सरकार के दौरान निकाली गई भर्तियों की लंबित प्रकियाओं को पूरी करने की मांग को लेकर पिकप भवन का घेराव किया। लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे छात्रों को पुलिस ने डरा-धमकाकर लाठियां भांजकर वहां से भगा दिया।

पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के दौरान उ.प्र. अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में ग्राम विकास अधिकारी के 16400 , कनिष्ठ सहायक के 13000 , सहायक लेखाकार के 11000 उर्दू अनुवादक, गन्ना पर्यवेक्षक मिलाकर तकरीबन 40 हजार छात्रों का भविष्य दांव पर लगा था।

इन सभी पदों की भर्ती प्रक्रिया 80 प्रतिशत तक पूरी भी कर ली गई थी। लेकिन सरकार बदल गई। योगी सरकार ने आते ही 29 मार्च 2017 को बिना कोई कारण बताए छात्रों का साक्षात्कार रोक दिया।

छात्रों का आरोप राजनीतिक रस्साकसी में फंसे थे छात्र- 

उ.प्र. अधीनस्थ सेवा प्रतियोगी मोर्चा के संयोजक कासिफ सिद्दिकी ने बताया कि भर्तियो का विज्ञापन जनवरी 2016 में जारी हुआ, मई से टेस्ट, शारीरिक परीक्षा सम्पन्न हुई, दिसंबर माह से साक्षात्कार प्रारम्भ हुआ। 29 मार्च 2017 को चल रहे साक्षात्कारों पर रोक लगाकर योगी सरकार ने छात्रों के भविष्य पर भी पहरा बैठा दिया।

साथ ही अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष व सदस्यों को हटा दिया गया जबकि 80% भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। भर्ती शुरू कराने को लेकर प्रतियोगी छात्रो ने लखनऊ में कई बार ज्ञापन दिए मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किए लेकिन भर्तियों की विजिलेंस जांच की बात कहकर सरकार पल्ला झाड़ती रही।

दिसंबर से लगातार चल रहा था प्रदर्शन- 

बीते साल 20 दिसंबर, 26 दिसंबर के बाद इसी साल 8 जनवरी, 16 जनवरी को इलाहाबाद जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया और 19 जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री के इलाहाबाद आगमन पर बालसन चौराहे पर सामूहिक उपवास के बाद गिरफ्तारी दी गई।

इसके बाद सरकार ने 22 जनवरी को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का पुनर्गठन करके हुए अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की प्रतियोगियो को लगा कि अब उनके अच्छे दिन आने वाले हैं।

लेकिन 31 जनवरी को बैठक में लम्बित भर्ती का मामला न उठने और नई भर्ती कराने के निर्णय से प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को आन्दोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ा।

इच्छा मृत्यु की मांग की थी छात्रों ने- 

इलाहाबाद, वाराणसी, जौनपुर, लखनऊ समेत पूरे प्रदेश से आए सैकड़ों छात्रों ने धमकी दी थी कि सरकार यदि लम्बित भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ कराने की बात पर ठोस आश्वासन नही देती तो सभी प्रतियोगी भाई-बहन सरकार से इच्छामृत्यु की माँग करेंगे और गोमती नदी में आत्मदाह करने के लिए विवश होंगे।

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