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UP जल निगम में भ्रष्टाचार का खुला खेल, 58 अंक वाले सवर्ण बने इंजीनियर, 60 अंक वाले OBC फेल

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

सरकार कोई भी शासन में हमेशा जाति दुराग्रह से भरे हुए लोग हावी रहते हैं। यही कारण है 2013 में पिछड़ों की सरकार होने का दंभ भरने वाली समाजवादी पार्टी की सरकार में ही पिछड़े छात्रों को ज्यादा अंक लाने के बाद भी मेरिट से बाहर कर दिया गया और उनसे कम अंक लाने वाले सवर्ण आज अवर अभियंता बनकर योग्यता के पुरोधा बने घूम रहे हैं।

2013 से ही आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी लगातार अपने वाजिब हक के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप और ज्यादा अंक पाने के बाद भी अभ्यर्थी दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं।

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लिखित में ज्यादा अंक पाने वालों को इंटरव्यू के लिए ही नहीं बुलाया- 

नियुक्ति 10 मई 2013 को विज्ञापन  द्वारा निकाली गईं। जिसमें सहायक अभियंता (सिविल), सहायक अभियंता (विद्युत/यांत्रिक),जूनियर इंजीनियर (सिविल) एवं जूनियर इंजीनियर (विद्युत/यांत्रिक) पदों पर नियुक्ति हुई। इस नियुक्ति में जनरल में फाइट करने वाले ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया।

इसमें जूनियर इंजीनियर सिविल  के 470 पद निकाले गए जिसमें सामान्य 235, ओबीसी- 127, एससी- 99 के पद थे। इन पदों की भर्तियों में लिखित परीक्षा कराने के बाद ओबीसी से कम अंक वाले सवर्ण छात्रों को इंटरव्यू के लिए बुला लिया गय।

लेकिन मेरिट लिस्ट जारी नहीं की गई 3 महीने बाद जब विभाग ने लिखित परीक्षा के नम्बर जारी किए तो पता चला कि कई ओबीसी अभ्यर्थियों के नंबर सामान्य से ज्यादा होने के बाद भी उन्हे इंटव्यू के लिए नहीं बुलाया गया।

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इस बात की जानकारी होने पर जागरूक छात्र ओबीसी आयोग में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। ओबीसी आयोग और हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 17.12.2014 को इस गड़बड़ी को देखते हुए विभाग से पूछा गया कि इन वंचित अभ्यर्थियों को विज्ञप्ति संख्या 3.10.2013 के पदों के विरुद्ध समायोजित करेंगे या समस्त भर्ती प्रक्रिया निरस्त कराना चाहिए।

कोर्ट के आदेश के बाद भी जातिवाद चलता रहा- 

18.12.2014 को विभाग ने इन अभ्यर्थियों को समायोजित करने पर सहमति जता दी थी जिसके बाद न्यायालय ने 2 महीने का समय इस काम के लिए विभाग को दे दिया। विभाग ने इस बीच में इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया तो लेकिन खानापूर्ति करने के बाद अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित कर दिया गया।

जबकि इस बार फाइनल  लिस्ट में तकरीबन 47 अभ्यर्थी ऐसे थे जिनके अंक सामान्य की मेरिट 58.8 से ज्यादा थे। और ओबीसी नियमानुसार 114 अभ्यर्थी ऐसे थे जिनको नियुक्ति मिलनी चाहिए थी लेकिन जल निगम ने सबको अयोग्य घोषित कर दिया और ज्वाइनिंग नहीं ली।

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इस मामले में हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को स्टे देते हुए सुनवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाई। लेकिन विभाग ने वंचितों को समायोजित करने के बजाय विज्ञप्ति दिनांक 3.10.2013 के विरुद्ध राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के प्रतिबंध के बावजूद नई नियुक्तियों का आदेश जारी कर दिया और तृतीय चरण की नियुक्तियों हेतु विज्ञप्ति जारी कर नियुक्ति भी कर दी गई.

दिसंबर 2016 में विभाग में हुई अंतिम में भ्रष्टाचार की जांच मुख्यमंत्री द्वारा एसआईटी (SIT) को सौंपी गई है। लेकिन इस में भर्ती विज्ञप्ति 10 मई 2013 को सम्मिलित नहीं किया गया है.

इस बारे में आरक्षित वर्ग के संघर्षशील अभ्यर्थियों ने सीएम को ज्ञापन सौंपा, पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री को ज्ञापन सौंपा लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। अभ्यर्थी ज्यादा अंक पाने के बाद भी दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

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ज्यादा अंक पाने वाले कुछ वंचित छात्र- 

सूरज कुमार यादव. धीरज कुमार मौर्य, सत्य प्रकाश पाल, श्याम कुमार, अभय राज यादव, गिरिराज किशोर, सेवेन्द्र सिंह राठौर, आशीष रस्तोगी मोहम्मद आसिफ, धर्मेंद्र कुमार, राजेंद्र यादव, गौतम पटेल आदि।

 

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