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चर्चित रायबरेली कांड में मारे गए हमलावरों से क्या है प्रमोद तिवारी और मनोज पांडेय का कनेक्शन !

नई दिल्ली/ रायबरेली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

पिछले दिनों रायबरेली के इटौरा गांव के ग्राम प्रधान रामश्री यादव की हत्या के इरादे से आए पांच बदमाशों की गाड़ी के भागते समय बिजली के खम्भे से टकराने से हुई मौत पर योगी प्रशासन अब बदमाशों के हमले से बचीं ग्राम प्रधान रामश्री यादव व उनके परिवार के अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में जुटा है।

मीडिया ने शुरूआत में तो मामले की सही रिपोर्टिंग की लेकिन नेताओं के इशारे पर जैसे ही ब्राह्मणवाद प्रभावी हुआ मीडिया की रिपोर्टिंग की भाषा ही बदल गई। हालत ये है कि पुलिस प्रशासन इटौरा गांव के आस-पास यादवों को कोई सभा नहीं करने दे रहा है जबकि ब्राह्मणों को सभा करने की खुली छूट है। अब पूरे मामले में कांग्रेस से राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और सपा विधायक मनोोज पांडेय के शामिल होने और मामले को पीछे से ब्राह्मण बनाम यादव बनाकर तूल देने में  दोनों की भूमिका की बात सामने आ रही है।

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कई मुकदमों में नामित अपराधी को कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी क्यों बता रहें हैं शरीफ- 

सवाल यहां से उठता है कि प्रमोद तिवारी रोहित शुक्ला के ऊपर कई थानों में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी उसे शरीफ आदमी क्यों बता रहे हैं? इसकी जांच-पड़ताल करने पर पता चलता है कि रोहित शुक्ला प्रमोद तिवारी के लिए काम करता था। वह प्रमोद तिवारी का गुर्गा था। लोगों को पकड़कर लाना और उसको प्रमोद तिवारी के पक्ष में काम करने के लिए मजबूर करने का काम रोहित शुक्ला करवाता था। यही वजह है कि प्रमोद तिवारी रोहित शुक्ला के साथ खड़े हैं। आप खुद देखिए मारे गए रोहित शुक्ला के ऊपर 8 मामले दर्ज हैं-

मारे गए बदमाश रोहित शुक्ला का आपराधिक रिकार्ड

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थानों की रिपोर्ट खुद बता रही है कि मारे गए लोग ब्राह्मण थे कि अपराधी- 

पांचों व्यक्ति बदमाश थे इसकी हकीकत थानों से मिल रही रिपोर्ट के आधार पर भी कही जा सकती है। जिस रोहित शुक्ला को कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी अच्छा आदमी बता रहे हैं, उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट समेत 8 मामले दर्ज हैं। प्रमोद तिवारी का जातिवाद इस कदर हावी होकर बोलने लगा कि जिस राजा यादव के खिलाफ थाने में कोई गंभीर केस दर्ज नहीं है, उसे शातिर अपराधी बता रहे हैं। प्रमोद तिवारी राजा यादव के खिलाफ एक भी क्रिमिनल रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके।

रोहित और अन्य लोग इटौरा गांव में रात को क्या कर रहा था-

यदि रोहित शुक्ला अपराधी प्रवृत्ति का नहीं था, तो वह भारी मात्रा में कारतूस लेकर  इटौरा गांव क्यों गया। उसने जो फायरिंग की है, उसके निशान राजा यादव के घर की दीवारों पर आज भी मौजूद हैं। पुलिस यदि इस मामले को गंभीरता से ले, तो कई और राज खुल सकते हैं। देर रात दूसरे जिले से यदि लोग आकर किसी गांव में फायरिंग करेंगे तो वह बदमाश नहीं तो क्या थे। स्थानीय लोग यह भी बताते हैं जब गाड़ी में आग लगी थी, तो कारतूस काफी देर तक जलता रहा।

विधायक मनोज पांडेय की संदिग्ध भूमिका- 

गांव वाले बताते हैं कि घटना की सूचना स्थानीय विधायक मनोज पांडे को जैसे ही लगी। ब्राह्मण होने के नाते उन्होने इस संबंध मे अपने परिचित इंस्पेक्टर (नाम नहीं छाप रहा हूँ) से बात करके सारे केस को अपने पक्ष मे मोड़ लिया। नेशनल जनमत ने पूछा कि ऐसा उन्होने क्यों किया ? वे तो सपा के विधायक हैं, अभियुक्त यादव समाज के लोग हैं। जो सपा के वोटर समझे जाते हैं।

इस बात पर गांव के लोगों ने कहा कि क्षेत्रीय विधायक मनोज पांडे की उपेक्षा और गांव के मसले में अनावश्यक हस्तक्षेप करने के कारण इस गांव के लोग बेहद नाराज थे, इसलिए उन्होने भाजपा के पक्ष मे मतदान किया था। दूसरा जिनसे विवाद था प्रधान का वो सभी ब्राह्मण थे तो विधायक जी अपनी जाति का धर्म निभा रहे हैं। इसी कारण उन्होने थाने पर दवाब बनवा कर ग्राम प्रधान के पति और उनके बेटों को गिरफ्तार करवा दिया।

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पुलिस मारे गए बदमाश रोहित शुक्ला की मोबाइल डिटेल से पता कर सकती है सच्चाई- 

कार में जलकर मरे रोहित शुक्ला समेत अन्य 4 लोगों की कॉल डिटेल पुलिस यदि निकाले, तो बहुत कुछ सामने आ सकता है। रोहित शुक्ला दिन में किस नेता के साथ था? वह कौन है? जिसने रोहित शुक्ला समेत अन्य चारों को ढाबे पर बैठाकर दारू पिलाई। दारू पीने के बाद रोहित शुक्ला ने ढाबे पर एक निर्दोष युवक के साथ गाली गलौच भी किया था। इसके बाद वहां के रोहित ने किसको फोन किया और दो घंटे में पैसा न देने पर गोली मारने की धमकी दी? इसके बाद रोहित शुक्ला अपने चार साथियों को लेकर हथियारों के साथ कहां पहुंचा, ये सब असली राज खोल सकते हैं।

 कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह कह चुके हैं मारे गए लोगों को अपराधी- 

भाजपा सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मारे गए लोग आपराधिक प्रवृत्ति के थे औऱ निर्दौष यादवों को फंसाया जा रहा है। रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह ने भी बयान देते हुए कहा है कि मारे गए हमलावर आपराधिक प्रवृत्ति के थे। लेकिन योगी सरकार ने ब्राह्मण महासभा के दबाव में फिलहाल इटौरा गांव के ग्राम प्रधान समेत कई यादव जाति के लोगों को संगीन धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

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पहले मीडिया ने भी सही रिपोोर्टिंग की थी बाद में जातिवाद के एंगल से मामले को देखने लगे- 

मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या और कांग्रेस नेता ठाकुर अखिलेश सिंह के अलावा शुरूआत में अमर उजाला समेत कई अखबारों ने घटना के अगले दिन इसी तरह की रिपोर्टिंग भी की थी, लेकिन दबंगों का और विज्ञापन न मिलने का दबाव बढ़ने पर पत्रकारिता को रौंद दिया गया। अब इसी घटना को यादव बनाम ब्राह्मण बनाकर पेश किया जा रहा है।

शुरूआत में अमर उजाला ने भी मामले की सही रिपोर्टिंग की

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हकीकत पर गौर करें तो रायबरेली के अपटा गांव की घटना, वहां की माफियागीरी और दबंगई की ओर इशारा करती है। आखिर प्रतापगढ़ जिले के पांच लोग (जबकि बताया जा रहा है कि कुल सात लोग थे, जिसमें से दो भाग गए थे, जिन्हें पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है।) हथियारों के साथ दूसरे जिले के एक गांव के प्रधान पर फायरिंग करने क्यों गए। वह वहां पर फायरिंग किस लिए कर रहे थे। पुलिस इस एंगल पर जांच करे, तो सच्चाई पूरी तरह साफ हो जाएगी।

 

 

 

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