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योगी बोले UPPSC भर्तियों की होगी CBI जांच, लोग बोले अच्छा है 54 यादव SDM का सच आ जाएगा सामने

लखनऊ/नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

आखिरकार उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने छात्रों की मांग के आगे झुकते हुए उ.प्र. लोक सेवा आयोग में सपा सरकार के समय हुई परीक्षाओं की सीबीआई जांच का आदेश कर ही दिया है। इस बात का ऐलान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में किया।

योगी ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान भर्तियों में जमकर गड़बड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि भर्तियों की सीबीआई जांच होगी और गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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हालांकि पिछड़े वर्ग के छात्र इस बात से खुश हैं कि मीडिया द्वारा बनाई गई यादव बाहुल्य मनगंढ़त लिस्टों का खुलासा सीबीआई जांच में अपने आप हो जाएगा।

मीडिया के दिमाग की उपज थी 86 में से 54 यादवों का एसडीएम बनना- 

दरअसल कॉरपोरेट मीडिया के जातिवादियों ने अखिलेश यादव की सरकार पर आरोप लगाया था कि उनके कार्यकाल में पीसीएस की परीक्षा में 86 में 54 यादव जाति के अभ्यार्थी एसडीएम पद पर चयनित हो गए है.  बाद में जब सच्चाई सामने आई तो ये पता लगा कि अखिलेश यादव के पूरे 5 साल के कार्यकाल को मिलाकर भी यादव जाति के 54 लोग एसडीएम नहीं बने हैं.

सिर्फ 5 यादव हुए थे चयनित- 

2012 की जिस पीसीएस परीक्षा को लेकर ये शोर मचाया गया था. उसकी सच्चाई ये है कि इस परीक्षा में कुल 379 पद थे. जिसमें से सिर्फ 30 पद ही एसडीएम पद के लिए स्वीकृत थे.  इन 30 पदों पर यादव जाति के सिर्फ 5 उम्मीदवार ही चयनित हुए थे.

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इससे साफ हो गया कि अखिलेश सरकार के खिलाफ अन्य पिछड़ी जातियों को भड़काने के लिए इंडिया टुडे और आजतक इस खबर को जोर शोर से उठाया था.

अन्य ओबीसी के उम्मीदवारों को बता दिया यादव-

दरअसल, ओबीसी समुदाय हमेशा से यूपी लोकसेवा आयोग पर ये आरोप लगाता रहा है कि इस समुदाय के लोगों को इंटरव्यू में कम अंक देकर भेदभाव किया जाता है. इसलिए लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव ने पहली बार इंटरव्यू को पारदर्शी बनाते हुए अभ्यर्थी का नाम और जाति इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों को न पता चले ये व्यवस्था कर दी.  ताकि धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव को रोका जा सके.

अनिल यादव से इतनी दिक्कत क्यों थी- 

यूपीपीएससी के चेयरमैन अनिल यादव द्वारा इस तरह की इंटरव्यू व्यवस्था के कारण योग्य पिछड़ी जाति के लोगों को इंटरव्यू में भी अधिक नम्बर मिलने लगे. ऐसा पहली बार था कि बड़ी संख्या में दलित और पिछड़ी जातियों के अभ्यर्थी भी जनरल सीट पर चयनित हुए.

इस बात से चिंतित होकर ही जातिवादी मीडिया समूहों ने अखिलेश सरकार के खिलाफ अन्य ओबीसी जातियों को भड़काने के लिए पटेल, मौर्या, और विश्वकर्मा जैसी जातियों के उन अभ्यार्थियों को भी यादव बता दिया जिन्हें इंटरव्यू में अधिक अंक दिए गए थे.

इसलिए योगी सरकार का कहना है कि यूपीपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन अनिल यादव की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। यादव को गिरफ्तार भी किया जा सकता है।

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15 हजार भर्तियों पर ग्रहण- 

सीबीआई जांच के आदेश के बाद करीब 15 हजार भर्तियों पर ग्रहण लग चुका है। यूपीपीएससी द्वारा पीसीएस अफसरों, डॉक्टरों, इंजिनियरों आदि की भर्ती की गई थी। इससे पहले योगी सरकार ने भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद यूपीपीएसी द्वारा की जा रही 22 भर्तियों के इंटरव्यू पर रोक लगा दी थी।

 

 

 

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