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संघी ना होने से पत्रकार उर्मिलेश निशाने पर, राज्यसभा टीवी के बाद प्रभात खबर का कॉलम भी बंद!

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश उर्मिल के राज्यसभा टेलीविजन पर हिट शो ‘मीडिया मंथन’ को बंद होने की चर्चा अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उनके लेखों को पसंद करने वाले लोगों के लिए एक और बुरी खबर आ गई. अब प्रभात खबर में हर सप्ताह आने वाला उनका कॉलम बंद कर दिया गया है.

प्रभात खबर ने उर्मिलेश का कॉलम बंद किया- 

खबरों के मुताबिक बिहार, झारखंड के प्रमुख हिन्दी दैनिक अखबार प्रभात खबर ने हर शुक्रवार को छपने वाला उर्मिलेश का साप्ताहिक कॉलम भी बंद कर दिया है. इसकी जानकारी देते हुए उर्मिलेश ने अपने फेसबुक एकाउंट पर लिखा है कि ‘ पता नहीं क्यों, आज बिहार और झारखंड के अनेक परिचित-अपरिचित लोगों ने अलग-अलग तरीके से संदेश भेजकर रांची, पटना, कोलकाता आदि से एक साथ प्रकाशित पूर्वी क्षेत्र के प्रमुख अखबार ‘प्रभात खबर’ में शुक्रवार को छपने वाले मेरे कालम के बंद होने पर मुझसे तरह तरह के सवाल पूछना शुरू किया!

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मैं अपने ऐसे पाठकों का आभारी हूं कि वे मेरे लेखों/टिप्पणियों का इंतजार करते थे। पर ऐसे तमाम पाठक मित्रों को बताना चाहूंगा कि ‘प्रभात खबर’ एक बेहतर अखबार रहा है और विश्वास करता हूं कि वह बेहतर अखबार बना रहेगा। इतने वर्षों तक उसने मेरा कालम छापा। अखबार का मैं आभारी हूँ.

हाल के दिनों में वहां संपादकीय नेतृत्व परिवर्तन हुआ। नये नेतृत्व को अपने विवेक से स्तम्भकार और लेखक तय करने, बदलने या लेखकों की सूची में फेरबदल करने का पूरा अधिकार है। ऐसे में मैं नये संपादक के फैसले का सम्मान करता हूं। विश्वास है, मेरे मित्र और शुभचिंतक इस स्थिति को समझेंगे. अपने पाठकों और ‘प्रभात खबर’ को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं. ‘

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उर्मिलेश ने दो दिन पहले ही राज्यसभा टीवी में मीडिया मंथन का अपना अंतिम शो किया है. राज्यसभा टीवी पर चलने वाला उनका शो ‘ मीडिया मंथन ‘ काफी लोकप्रिय रहा है. राज्यसभा टीवी पर शो बंद होने को लेकर उनके चाहने वालों ने सोशल मीडिया पर उर्मिलेश से अनुरोध किया कि वो  हटाए जाने के कारणों को सार्वजनिक करें.

जाति और विचारधारा के कारण तो उर्मिलेश को निशाना नहीं बनाया जा रहा- 

सोशल मीडिया पर सक्रिय कई सामाजिक चिंतकों ने ये आशंका जाहिर की है कि हो सकता  है कि  उर्मिलेश को उनकी जाति यादव होने और गैर संघी मानसिकता का होने के कारण तो निशाना नहीं बनाया जा रहा है. आपको बता दें कि उर्मिलेश ने कई मंचों से मीडिया में सवर्णों ( खासकर ब्राह्मणों  )  के वर्चस्व  की बात उठाई है .

इसके अलावा उर्मिलेश भाजपा की साम्प्रदायिक नीतियों और पीएम मोदी की कॉरपोरेट के हितों वाली नीतियों के भी मुखर आलोचक रहे हैं. लोगों का मानना है कि जातिगत और वैचारिक कारणों से ही उर्मिलेश को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि सत्ता के खिलाफ बोलने वाली हर आवाज को सबक सिखाया जा सके.

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