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वाराणसी: दलित छात्रा अनीता की सांस्थानिक हत्या के विरोध में SC, ST, OBC संघर्ष समिति ने निकाला कैंडल मार्च

नई दिल्ली/वाराणसी। नेशनल जनमत ब्यूरो।

सरकार की गलत नीतियों के कारण अपनी जान गवां देने वाली तमिलनाडु की मेडीकल की तैयारी करने वाली दलित छात्रा अनीता को श्रद्धांजलि देने के लिए बीएचयू के लंका गेट पर कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। अनीता ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बहस की थी।

SC ST OBC संघर्ष समिति द्वारा आयोजित इस मार्च में काशी विद्यापीठ के आम्बेडकरवादी युवाओं का संगठन, भगत सिंह आम्बेडकर विचार मंच, स्टूडेंट फ़ॉर चेंज के साथियों ने हिस्सा लिया।

कैंडल मार्च के बाद आयोजित शोक सभा को सुनील यादव, डॉ अनिल चौधरी, कुणाल किशोर विवेक ,विनय गुप्ता,नरेश राम व रवींद्र प्रकाश भारतीय ने संबोधित किया।

सुनील यादव ने शिक्षा व्यवस्था में प्रतिनिधित्व की हत्या, डॉ. अनिल चौधरी ने विश्वविद्यालयो में चल रहे आंदोलन, कुणाल किशोर विवेक ने आंदोलन की रूपरेखा व संघर्ष, साथी विनय गुप्ता ने सभी वंचितो के एकजुट होने पर जोर दिया। नरेश राम ने अपने क्रांति गीत से साथियो में जोश भरा तथा अनीता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

रविन्द्र प्रकाश भारतीय ने भारत मे शिक्षा व्यवस्था में असमानता, दुर्व्यवस्था व गैरलोकतांत्रिक प्रयासों पर प्रहार किया। अन्य साथियों ने भी वर्तमान सरकार को लताड़ते हुए की उनका वादा था एक समान शिक्षा व्यवस्था,से केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

लोकतंत्र को चुनौती देने वालो हर ताकत से लड़ने की प्रतिबद्धता के साथ ही यह शोक सभा समाप्त कर दी गई। यहां पर बालगोविंद, वीके सहगल, विकास राठौर, धनञ्जय भारती, रीना, कृष्ण कुमार यादव, नीतिकेश यादव व अवनीश यादव, हेमंत कुमार, स्वाति, नंदलाल, विजय व अन्य कई संघर्ष के साथियों ने सहभागिता करते हुए श्रद्दांजलि अर्पित की।

अनिता ने क्यो की थी आत्महत्या ?

अनीता ने तमिलनाडु के कुझुमुर गांव में स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। दैनिक मजदूर की 17 वर्षीय बेटी अनीता ने तमिलनाडु स्टेट बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में 1200 में से 1176 नंबर पाये थे. जिसके आधार पर उनका एडमिशन एमबीबीएस में हो जाता लेकिन नीट परीक्षा के चलते ऐसा संभव नहीं हुआ.

गौरतलब है कि पिछले साल तक तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेज में दाखिल बारहवीं में प्राप्त अंकों के आधार पर हो जाता था. हालांकि नीट परीक्षा का आयोजन केंद्र सरकार ने पिछले साल भी किया था लेकिन तब तमिलनाडु को इससे छूट मिल गई थी.

इस साल भी तमिलनाडु सरकार ने अध्यादेश लाकर नीट परीक्षा से बाहर होने का प्रयास किया था लेकिन 22 अगस्त को सुप्रीट कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था.

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