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शर्मनाक: वसुंधरा सरकार के ‘निर्लज्ज’ और ‘बेहूदे’ स्वच्छता आदेश ने ली है समाजसेवी जफर खान की बलि

नई दिल्ली/ जयपुर। नेशनल जनमत ब्यूरो।

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के सामाजिक कार्यकर्ता जफर खान, सरकार के बेहूदे स्वच्छता अभियान की भेंट चढ़ गए. जफर खान को सरकारी गुंडों ने पीट- पीट कर मार डाला.

दरअसल राजस्थान सरकार ने स्वच्छता अभियान के नाम पर खुले में शौच जाने वालींमहिलाओं-पुरुषों की फोटो खीचकर सोशल मीडिया पर डालने का आदेश दिया है. ऐसा करने पर किसी भी तरह की कोई कानूनी या पुलिस कार्रवाई नहीं होगी. ऐसे में सरकारी आदेश के पालन के नाम पर स्वच्छता अभियान से जुड़े नगर निगम के कर्मचारी कई जगह महिलाओं की आपत्तिजनक फोटों खीच लेते हैं.

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ऐसा ही वाकया प्रतापगढ़ में हुआ. जफर खान ने इन सरकारी लफंगों की करतूत का विरोध कर दिया. बस फिर क्या था सरकारी गुंडों ने सराकारी आदेश के नाम पर जफर खान को इतना पीटा की उनकी मौत हो गई.

सामाजिक चिंतक और डूंगरपुर महाविद्यालय में प्रवक्ता हिमांशु रविदास अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि-

यदि आपको यह बात अविश्वसनीय लग रही हो कि सरकारी कर्मचारी शौच कर रही महिलाओं की तस्वीर भला क्यों उतारेंगे तो जान लीजिए – ‘स्वच्छ भारत’ अभियान को सफल बनाने केलिए राजस्थान के कुछ जिलों में बाक़ायदा ज़िला शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्कूल शिक्षकों की ड्यूटी लगायी गयी थी कि वे सुबह पाँच बजे उठकर घूमेंगे और खुले में शौच कर रहे लोगों की तस्वीरें खींचकर उसी समय व्हाट्सएप करेंगे. यही नहीं, जिन बच्चों के घरों में शौचालय नहीं है, प्रार्थना में उन्हें शेष से अलग करके अपमानित करने के भी निर्देश थे. यह जिला है झालावाड़ – मुख्यमंत्री महोदया का गृह जिला.

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स्वच्छ भारत अभियान ने ली है कॉमरेड जफर खान की बलि- 

‘स्वच्छ भारत’ अभियान ने आज हमारे राज्य में एक बलि ले ली. सीपीआई-एमएल के कॉमरेड जफ़र हुसैन की. वे नगरपालिका कर्मचारियों को खुले में शौच कर रही महिलाओं की तस्वीर लेने से रोक रहे थे. वे महिलाएं जिस कच्ची बस्ती से आती हैं, वहां शौचालय न होने के बाबत वे पहले भी शिकायत कर चुके थे.

राजस्थान में लम्बे अरसे तक रहे और अब झारखण्ड निवासी कॉमरेड जिज्ञासु ने उनके बारे में लिखा है, “अपने डेढ़ दशक के राजस्थान प्रवास के दौरान जिन चुनिन्दा साथियों के साथ गरीबों, अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष करने का अवसर मुझे प्राप्त हुआ उन साथियों में से एक अत्यंत जुझारू और संघर्षशील साथी थे कामरेड ज़फर हुसैन. कई आन्दोलनों में राजस्थान पार्टी कमिटी ने मुझे उस क्षेत्र में संगठन निर्माण के लिए जिम्मेवारी दी जहाँ कामरेड ज़फर कार्यरत थे.

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आदिवास बहुल इलाका है प्रतापगढ़- 

प्रतापगढ़ आदिवासी बहुल इलाका है. एक दशक से भी ज्यादा समय से गरीबों के लिए आवाज़ उठाकर आरएसएस और बीजेपी की आँखों की किरकिरी बन गए थे कामरेड ज़फर. एक तो मुसलमान ऊपर से कम्युनिस्ट क्रांतिकारी. फासीवादी सोच की वर्तमान अवधारणा ने स्वच्छ भारत अभियान की पोल खुलते देख उन्हें निशाना बनाया.

शौचालय नहीं, महिलाएं खुले में शौच को बाध्य और बीजेपी आरएसएस के लोग इस स्थिति की तस्वीरें लगातार ले रहे थे. महिलाओं को बेइज्ज़त कर रहे थे. संघर्ष की बुलंद आवाज़ एक बार फिर मुखर हुई. कामरेड ज़फर ने विरोध करना शुरू किया. शौच करती महिलाओं की तस्वीरें क्यों ले रहे हो. बस, क्या था. निशाना बना डाला जालिमों ने. पीट पीट कर मार डाला कामरेड ज़फर को.”

वैसे यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि इस सरकार की सारी बड़ी पहलकदमियाँ अंततः दलित,अल्पसंख्यक,किसान,मजदूर विरोधी ही क्यों साबित होती हैं.
आपातकाल को याद कीजिये. तब भी बड़ी मानीखेज पहलकदमियाँ हुई थीं.

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इसी घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अरविद शेष अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि ….

हत्यारा हो गया मोदी का स्वच्छ भारत अभियान- 

मुझे नहीं पता कि जफ़र खान की हत्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने प्रिय ‘स्वच्छ भारत’ प्रोग्राम पर खुश होंगे या शर्म से एक बार आईने में देखेंगे कि उनका ‘स्वच्छ भारत’ किस कदर हत्यारा हो गया है…!

मुझे यह भी नहीं पता कि जिन महिलाओं को सोने तक के लिए ढाई गज जगह नहीं होगी, उनके खुले में शौच करने जाने से मोदी के किस सपने को शर्म आ रही थी…। जब सरकारी कर्मचारी खुले में शौच करती महिलाओं की फोटो खींच रहे थे तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘स्वच्छ भारत’ के इस हमले पर शर्म करना जरूरी समझा होगा…? शौच करती महिलाओं की फोटो खींचने से रोकने वाले बुजुर्ग जफ़र खान को जब पीट-पीट कर मार डाला गया, तो उसके बाद किसको-किसको शर्म आई…?

ये कैसा समाज बना दिया आपने मोदी जी…! अगर हकीकत को देख सकने की सलाहियत नहीं है… गुंडों और सरेआम के हत्यारों को कंट्रोल करने की क्षमता नहीं है तो किसी बात की मुनादी क्यों कर देते हैं आप…! क्या आप ये चाहते हैं कि इस देश के लोग जॉम्बी बन जाएं… जिंदा ड्रैकुला… जो पहले अपने आसपास वालों को जिंदा चीड़-फाड़ कर खाता है… फिर सबके खत्म हो जाने के बाद खुद को ही चीड़-फाड़ कर खाने लगता है…!क्या आप चाहते हैं ऐसा…?

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नेशनल जनमत के सवाल- 

कॉमरेड और संघर्षशील सामाजिक कार्यकर्ता की जान की कीमत स्वच्छता अभियान से ज्यादा कीमती है क्या ?

कौन सा नियम या नैतिकता कहती है शौच कर रहे महिला-पुरुषों की फोटो खीचो और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दो.

जफर खान जिस बस्ती में शौचालय ना होने की बात सरकार से कह रहे थे उनकी बात क्यों नही सुनी गई.

महारानी वसुंधरा राजे शायद फूल गईं है कि इस देश में कई महिलाओं को सोने की जगह नसीब नहीं तो ऐसे में घरों में शौचालय कहां से होगा.

क्या सरकार के इस बेहुदे फैसले से महिलाओ के खिलाफ अपराध और सामाजिक अशांति की आशंका नहीं बढ़ गई हैं.

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