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BHU छात्राओं के संघर्ष को मिली सफलता, लंबी छुट्टी पर भेजे गए ‘तानाशाह’ कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी

नई दिल्ली/वाराणसी। नेशनल जनमत ब्यूरो।

पिछले महीने आंदोलनकारी छात्रों से निपटने के तरीकों को लेकर विवादों में आए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। हालांकि कुलपति ने इस बाबत निजी कारणों का हवाला दिया है।

इससे पहले त्रिपाठी ने दावा किया था कि अगर उन्हें अवकाश पर जाने को कहा गया तो वह इस्तीफा दे देंगे लेकिन छुट्टी पर नहीं जाएंगे।

बीएचयू के अधिकारियों ने बताया कि त्रिपाठी ‘‘अनिश्चितकालीन अवकाश’’ पर चले गए हैं. उनका कार्यकाल 30 नवंबर तक है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय सूत्रों ने संकेत दिया था कि केंद्र सरकार इस पूरे मामले में निपटने के उनके तरीके को लेकर खुश नहीं है.

‘नेशनल जनमत’ ने लगातार लिखा है कि कुलपति जीसी त्रिपाठी के राज मे बीएचयू में जातिवाद, अश्लीलता और अराजकता बढ़ी है। इसके बाद इस बात पर पर कमिश्नर वाराणसी ने भी अपनी जांच में मोहर लगा दी थी। अब छुट्टी पर भेजे जाने से इस बात की पुष्टि एचआरडी मंत्रालय ने भी कर दी है।

क्या हुआ था बीएचयू में?

बीएचयू में विवाद छात्राओं की सुरक्षा को लेकर ही तब शुरू हुआ जब 21 सितंबर को फाइन आर्ट्स की एक छात्रा से कैंपस में छेड़छाड़ हुई. छात्रा की शिकायत के बावजूद आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

विरोध में 22 सितंबर को छात्राओं ने विश्वविद्यालय में धऱना शुरू कर दिया. 23 सितंबर को कुलपति आवास का घेराव करने जा रही छात्राओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. छात्राओं पर लाठीचार्ज से हो रही किरकिरी से बचने कि लिए विश्वविद्यालय हर रोज नई दलील दे रहा है.

कमिश्नर की जांच में सामने आई थी लापरवाही- 

वाराणसी के कमिश्नर की जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ था कि बीएचयू बवाल कुलपति के गलत रवैये के कारण ही इतना बढ़ा है।दरअसल छात्राओं ने आरोप लगाया था कि कुलपति पीड़ित छात्राओं से मुलाकात ही नहीं करना चाहते। इस मामले की जांच प्रदेश सरकार द्वारा कमिश्नर वाराणसी को सौंपी गई थी। कमिश्नर नितिन गोकर्ण की जांच में इस बात की पुष्टि हो गई थी कि छात्राओं के आरोप सही हैं।

कुलपति का रवैया छात्राओं के प्रति असहयोगात्मक था। जिससे नाराज होकर बीएचयू के हजारों छात्र-छात्राओं को विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होना पड़ा था। कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बीएचयू में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन खुद जिम्मेदार है।

वाराणसी कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बीएचयू कुलपति जीसी त्रिपाठी को दिल्ली तलब किया था। हालांकि उस समय कुलपति ने दिल्ली तलब किए जाने की खबर को झूठा कहा था।

ऐसा माना जा रहा था कि बीएचयू में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद कुलपति को छुट्टी पर भेजा सकता है। बीएचयू में छात्रों पर की गई बर्बरतापूर्वक पुलिसिया कार्रवाई से विश्वविद्यालय की छवि पूरे देश में धूमिल हुई है।

कमिश्नर ने यूपी के चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार को दी गई रिपोर्ट में कहा, विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की, और न ही विश्वविद्यालय परिसर में उपजे विवाद को ठीक ढंग से संभाला गया।

एक छात्रा का शिकायती पत्र- 

 

लड़कियों का बीएचयू प्रशासन पर गंभीर आरोप था-

प्रोटेस्ट कर रही स्टूडेंट आकांक्षा सिंह ने विरोध के दौरान सिर के बाल मुंडवा लिया था। उसका कहना है कि छेड़खानी होते रहे और हर वक्त हम खामोश रहे, ऐसा नहीं हो सकता है।

छात्राओं का आरोप है कि घटना के दौरान गेट पर सिक्‍युरिटी गार्ड तैनात था लेकिन उसने छोड़खानी का विरोध नहीं किया। छात्रा हॉस्‍टल में रहकर पढ़ाई करती है। जब मामले की जानकारी अन्‍य छात्राओं को हुई तो हास्‍टलर्स समेत अन्‍य छात्राओं ने विरोध जताना शुरू कर दिया।

मामला बीएचयू प्रशासन तक पहुंचा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि न्‍याय के लिए विरोध कर रही छात्राओं को चुप रहने के लिए कहा जा रहा है।

इतना ही नहीं कई छात्राओं को हास्‍टल में ही बंद कर दिया गया है और विरोध दबाने की कोशिश की जा रही है। बनारस हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय में छात्रा से छेड़खानी को लेकर अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं, इससे छात्राओं का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।

कपड़े तक फाड़ने की धमकी देते हैं- 

प्रोटेस्ट कर रही रश्मि ने बताया,”हॉस्टल की खिड़कियों पर लड़के पत्थर में लेटर लिखकर फेंकते है। खिड़कियों पर खड़ा होने पर लड़कियों को अश्लील इशारे करते हैं। विरोध करने पर कहते है, कैंपस में दौड़ाकर कपड़े फाड़ देंगे।

स्टूडेंट पल्लवी ने कहा, ” कैंपस में ही लड़के फिजिकली एब्यूज कर रहे है। कपड़े फाड़ने की धमकी तक दी जाती है। कल की घटना के बाद हम सभी को खामोश रहने की चेतावनी दी गयी है। सर्कुलर जारी किया गया है शाम 6 बजे के बाद सुबह में अंधेरे तक लड़कियां ना निकले। ये कैसी आजादी है।

बीएचयू में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ ही आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बीएचयू में हुई नियुक्तियों में जातिवादी खेल को लेकर एससी, एसटी कमीशन के अलावा राष्ट्रपति सचिवालय से नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है।

आपको बता दें  छेड़छाड़ मामले में कुछ लड़किया वीसी से मिलकर शिकायत दर्ज कराना चाहती थीं। लेकिन कुलपति कार्यालय की ओर से सिर्फ 4-5 लड़कियों को मिलने के लिए कहा गया।

जिसके बाद विश्वविद्यालय के छात्र और छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया।  पुलिस ने विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर लाठी चार्ज किया था।

नेशनल जनमत ने लगातार दिखाया सच- 

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