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भगोड़े माल्या केस में देश से झूठ बोल रही है मोदी सरकार, लंदन की अदालत ने खोली पोल

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

देश के प्रमुख बिजनेस अखबार फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के अनुसार सरकार विजय माल्या को भारत लाने के प्रयासों का सिर्फ दिखावा कर रही है. हकीकत ये है कि सरकार विजय माल्या केस में गंभीर ही नहीं है. लंदन की एक कोर्ट ने विजय माल्या प्रत्यर्पण मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि भारत सरकार की तऱफ से सबूत देने में देरी की जा रही है.

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प्रत्यर्पण से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए वेस्टमिंस्टर की मजिस्‍ट्रेट अदालत में बुधवार को विजय माल्या पेश हुआ. जहां उसे चार दिसंबर तक जमानत दे दी गई. किंगफिशर एयरलाइंस का प्रमुख रह चुका 61 साल का माल्या अप्रैल में अपनी गिरफ्तारी के बाद से जमानत पर है.

पढ़िए मजिस्ट्रेट ने क्या कहा- 

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्‍ट्रेट एम्मा लुइस अरबुथनाट ने माल्या को चार दिसंबर तक जमानत देते हुए कहा कि भारत सरकार की तरफ से इस केस में ढिलाई बरती जा रही है. पिछले छह महीने से यही हो रहा है मजिस्ट्रेेट ने कहा कि छह हफ्ते से तो इस केस में कोई प्रोग्रेस ही नहीं हुई है. उसकी वजह भारत सरकार का लचर रवैया है. भारत सरकार इस केस में सबूत भेजने में देरी कर रही है.

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माल्या ने अदालत के बाहर पत्रकारों से कहा कि ‘मैंने कोई लोन डायवर्ट नहीं किया. मैं मीडिया के लिए जवाबदेह नहीं हूं, इसलिए मीडिया को कोई जवाब नहीं दूंगा’. भारतीय अधिकारियों की तरफ से ब्रिटेन क्राउन प्रॉसिक्यूशन सवर्सि र्सीपीएसी ने अदालत में भारतीय अधिकारियों का पक्ष रखा.

भारत का भगोड़ा है विजय माल्या-

माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस ने बैंकों का करीब 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुकाया है. इस मामले में वह भारत में वांछित हैं. वह मार्च 2016 से ब्रिटेन में है. बीते 18 अप्रैल को प्रत्यर्पण वारंट पर स्कॉटलैंड यार्ड ने उसे गिरफ्तार किया था. भारत का प्रर्वतन निदेशालय उसको भगोोड़ा साबित कर चुका है.

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साभार- फाइनेन्सियल एक्सप्रेस http://bit.ly/2tmBMmu

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