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VIP कल्चर खात्मे की नौटंकी : BJP के मंत्री को भाषण के दौरान दी चिट तो असि. प्रोफेसर हो गए सस्पेंड

नई दिल्ली, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीआईपी कल्चर खत्म करने के नाम पर मंत्रियों और अधिकारियों की गाड़ी से लाल बत्ती उतरवा दी। लेकिन सवाल ये है कि इस कवायद से माननीयों ने खुद को प्रजा से ऊपर मानना बंद कर दिया है क्या ?

‘नेशनल जनमत’ ने इस मुद्दे पर जब लोगों की राय ली और मंत्रियों के रहने का तरीका देखा तो सिर्फ एक बात में फर्क दिखा कि उनके पास अब लाल बत्ती की गाड़ी नहीं है बाकी ठाठ अभी भी वही हैं।

मंत्रियों का काफिला अभी भी सायरन बजाता हुआ निकलता है, मंत्रियों के अंदर मानसिकता आज भी वही है कि वो सामान्य लोगों से अलग हैं। वोटर प्रजा है वो मंत्री बनने के बाद उनके राजा।

इस मानसिकता को करीब से समझने के लिए आपको त्रिपुरा विश्वविद्यालय में 23 मई को हुई घटना के बारे में जानना होगा। यहां एक हिन्दी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर को सिर्फ इसलिए सस्पेंड कर दिया गया क्योंकि उन्होंने बीजेपी के एक मंत्री को भाषण खत्म करने की चिट दे दी थी।

क्या था मामला- 

डॉ. जय कौशल, निलंबित शिक्षक

दरअसल त्रिपुरा विश्वविद्यालय में 23 मई को वार्षिक समारोह आयोजित किया गया था। जिसमें उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू मुख्य अतिथि के बतौर शिरकत कर रहे थे। समारोह में उपराष्ट्रपति के भाषण के बाद प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ बोलने के लिए आए।

लेकिन उनके बोलने के कुछ देर बाद ही संचालन कर रहे हिन्दी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जय कौशल ने उनके सामने एक चिट रख दी। जिसमें भाषण को संक्षिप्त करने के लिए कहा गया था।

बस फिर क्या था मंत्री जी के अभिमान को ठेस पहुंच गई वो बिफर पड़े पहले तो शिक्षक को भला बुरा कहा फिर इसे राज्य सरकार का अपमान बताकर कार्रवाई पर अड़ गए।

जब तक कार्रवाई का आश्वासन नहीं दिया गया तब तक मंत्री जी पूरे विश्वविद्यालय अधिकारियों की डांट डपट करते रहे। इसके बाद कुलपति प्रोफेसर एके घोष ने उच्चस्तरीय कमेटी को जांच सौंपते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया।

सूत्रों की मानें तो शिक्षक ने ऐसा सिर्फ इसलिए किया था क्योंकि समारोह के मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू बोले चुके थे और तय समय से समारोह लेट होने पर वहां से जाना चाहते थे, इसलिए मंत्री के सामने वो चिट पहुंचाई गई थी।

मंत्री महोदय निलंबन से संतुष्ट नहीं- 

इस मामले को राज्यसरकार के अपमान से जोड़ते हुए मंत्री महोदय केवल शिक्षक के निलंबन से संतुष्ट नहींं हैं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये राज्य सरकार का अपमान करने की सोची समझी साजिश है। कुलपति महोदय को पता करना चाहिए इस विवाद के पीछे किसका दिमाग है और उसे सजा देनी चाहिए।

फिलहाल जानकारी ये मिल रही है कि इस मामले में छात्रों और विश्वविद्यालय शिक्षकों के विरोध के बाद कुलपति ने भी नरम रुख अपना लिया है और माना है कि इस मामले में शिक्षक को जल्दबादी मे दंडित कर दिया गया है। कुलपति फिलहाल तो बाहर हैं लेकिन आते ही एक दो दिन में शिक्षक को बहाल कर सकते हैं।

निलंबन में कारण प्रोटोकॉल के उल्लंघन को बताया गया है। अब बड़ा सवाल ये है कि क्या ये इतना बड़ा मामला था कि किसी असिस्टेंट प्रोफेसर को चिट पहुंचाने के लिए निलंबित किया जाए?

क्या मंत्री महोदय सामान्य से इतने ऊपर के व्यक्ति हैं कि भाषण जल्दी समाप्त करने की बात करने पर उनका अपमान राज्य सरकार का अपमान हो गया?

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