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दर्जनों जान लेने वाले व्यापमं घोटाले में CBI ने CM शिवराज को दी क्लीन चिट, कांग्रेस ने उठाए सवाल

नई दिल्ली/भोपाल, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाला मामले में जो आशंका थी आखिर वही हुआ। शिवराज सिंह चौहान के सीएम रहते इस महाघोटाले की जांच के दौरान घोटाले के आरोपी तीस से ज्यादा लोगों की रहस्यमयी मौत भी हुई थी।

अब पिजड़े का तोता होने का आरोप झेलने वाली सीबीआई ने शिवराज सिंह चौहान को पूरी तरह से क्लीन चिट दे दी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बरामद हार्ड डिस्क में सीएम का नाम कई जगह था जिसके साथ छेड़छाड़ की गई है।

सीबीआई ने मंगलवार को अपना आरोप पत्र दाखिल किया और वह आरोप खारिज कर दिया कि एक आरोपी से जब्त कंप्यूटर हार्डडिस्क में छेड़छाड़ की गई है। कांग्रेस ने पहले ही आरोप लगाया था कि इसी हार्ड डिस्क में सीएम शब्द का जिक्र था। सीबीआई ने इस मामले में तीन व्यापमं अधिकारियों समेत 490 लोगों को आरोपी बनाया है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, ‘सीबीआई ने 490 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की है. इसमें तीन व्यापमं के अधिकारी, तीन रैकेटियर, 17 बिचौलिये, 297 लाभार्थी और नकल कराने वाले छात्र, 170 अभिभावक शामिल हैं.

विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष दाखिल अपने आरोपपत्र में एजेंसी ने कहा कि मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के एक अधिकारी नितिन महिंद्रा से बरामद हार्ड डिस्क ड्राइव के मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा कराए गए फोरेंसिक विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि उनमें कोई ऐसी फाइल नहीं थी जिसमें सीएम शब्द लिखा हो।

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि उसने हार्ड डिस्क के साथ छेड़छाड़ के कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और व्हिसल ब्लोअर प्रशांत पांडेय के आरोप को खारिज कर दिया. हार्ड डिस्क को करोड़ों रुपये के भर्ती घोटाले में अहम सबूत माना जा रहा था.

इसमें कहा गया है कि पांडेय ने अपने दावे के समर्थन में दिल्ली उच्च न्यायालय और सीबीआई को दो पेन ड्राइव सौंपे थे. पांडे ने दावा किया था कि इंदौर पुलिस ने 2013 में बरामद हार्ड डिस्क में छेड़छाड की गई थी ताकि रिकॉर्ड से सीएम शब्द हटाए जा सकें.

दिग्विजय सिंह ने लगाया था आरोप- 

कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी दावा किया था कि व्यापमं मामले में पुलिस द्वारा सीज की गई हार्ड डिस्क के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम हटाने के लिए छेड़छाड़ की गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, ‘सीबीआई का कहना है कि उस आरोप में सच्चाई नहीं थी. दिग्विजय का आरोप था कि व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी अधिकारी नितिन महिंद्रा के पास से हार्ड डिस्क जब्त की गई थी जिससे छेड़छाड़ करके ‘सीएम’ शब्द की जगह ‘एम/एस’ लिख दिया. यह शिवराज चौहान को बचाने के लिए किया गया.’

एक्सप्रेस के मुताबिक, ‘नितिन महिंद्रा उस समय मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल में प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट थे. आरोप था कि उन्होंने अपने कंप्यूटर में एक एक्सल फाइल में कई प्रभावशाली लोगों की एक सूची बनाई थी, जो इस केस से जुड़े थे.

18 जुलाई, 2013 को इंदौर पुलिस ने उनकी हार्डडिस्क जब्त कर ली थी. दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हार्डडिस्क में ‘सीएम’ शब्द 48 बार था. व्हिसिलब्लोअर प्रशांत पांडेय ने भी यही आरोप लगाए थे. पहले यह जांच मध्य प्रदेश पुलिस कर रही थी, जिसे बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया था.’

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