ऑफिस या ट्रेन में आरक्षण की बहस में आप चुप हो जाते हैं, तो पढ़िए वकार साहब का ‘आरक्षण गणित’

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

ऑफिस हो, ट्रेन हो या बस की यात्रा ऐसी किसी भी सार्वजनिक जगह में कई बार आरक्षण को लेकर बहस छिड़ जाती है, लेकिन अच्छे तर्क ना होने की स्थिति में ना चाहते हुए भी लोग जातिवादियों की बातें सुनकर चुप हो जाते हैं. आपके आरक्षण के प्रति ज्ञान को साधारण सेे शब्दों में समझाया है फेसबुक पर सक्रिय वकार अहमद साहब ने. जिनको आप फेसबुक पर waqar ahmad aipmm के नाम से देखते हैं. आप भी पढ़िए इनका आरक्षण का गणित.

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आरक्षण का बहुत सही गणित है, जरा ध्यान दें हमारे गणित पर- 

माना कि 100 व्यक्ति हैं. और इन 100 व्यक्तियों कोे खाने के लिए 100 रोटियां हैं। वर्तमान में पिछड़ी जाति OBC के 60 व्यक्तियों को खाने के लिए 27 रोटियों की व्यवस्था है। इसी तरह अनुसूचित जाति SC व जनजाति ST के 25 व्यक्तियों के एक समूह के लिए 22.5 रोटियों की व्यवस्था है। अब सामान्य वर्ग के तकरीबन 15 आदमियों के लिए 50 रोटियां शेष बचती हैं.

ब्राह्मण पूरी गणित गड़बड़ कर रहा है- 

समस्या ये है कि सामान्य वर्ग GENERAL के 15 आदमियों में से 3% ब्राम्हण जाति के आदमी बेहद शक्तिशाली हैं जो शेष बची 50 रोटियों में से लगभग 45 रोटियां खा जा रहे हैं. अब समस्या ये है कि सामान्य वर्ग के 12 आदमियों के लिए मुश्किल से सिर्फ 5 रोटियां ही मिल पा रहीं हैं. इसी कारण सामान्य जाति के जाट, मराठा, लिंगायत, पटेल या पाटीदार अपने लिए OBC की 27 रोटियों में हिस्सेदारी मांग रहे हैं.

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अब समस्या ये है कि ओबीसी के 60 लोग वैसे ही सिर्फ 27 रोटियों पर गुजारा करके अपनी जिंदगी चला रहे हैं ऐसे में वो जाट, मराठा और लिंगायत में अपने हिस्से की 27 रोटियां बांटने को हरगिज तैयार नही हैं। इस समस्या का एक ही समाधान है कि कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई *50% आरक्षण* की सीमा रेखा को लांघा जाऐ और जाट, मराठा, और लिंगायत के साथ साथ सभी जातियों को उनकी संख्या के अनुपात में शिक्षा & नौकरियों में आरक्षण दिया जाऐ। अब *60 लोगों* के हिस्से की *27 रोटियों* पर *झपट्टा मारने* से बात नही बनेगी।

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ओबीसी के लिए समस्या का समाधान- 

जरूरत इस बात की है कि सारी पिछड़ी जाति OBC* के लोग *और पटेल, जाट, गूजर , अहीर , यादव , गडरिया , सुनार, लोहार , कुम्हार , कश्यप , निषाद , कुशवाहा , सैनी, माली , मराठा, लिंगायत आदि एक मंच पर आएं और उन 3% ब्राह्मण लोगों से अपना हिस्सा छीनें जो सिर्फ *3% होकर 45 रोटियां तोड़े जा रहे हैं। अगर ये ब्राह्मण जाति के 3 लोग सिर्फ 3 रोटी खाकर जीना सीख ले तो समाज मे कोई भी भूखा नहीं रहेगा।  अगर आरक्षण का गणित अभी नहीं समझेंगे तो कभी नहीं समझेंगे आप।

इससे आसान उदाहरण नहीं मिलेगा।

1 Comment

  • Phool singh , 16 June, 2017 @ 7:38 am

    जब शिक्षा को निजी करण कर दिया क्यों कि ये शिक्षक ना बन सके, शिक्षा के कारण मनुष्य, समाज व देश का विकास होता है ।और समाज में परिवार का विकास व दर्द वह समझेगा जो पारिवारिक होगा ।मैं गरीब व अनुसूचित जाति से संबंधित हूँ ,विकास का मतलब शिक्षा देश नई तकनीकी से संबंधित सरकार गरीबों लोगों को सस्ती शिक्षा दे ना कि अमीरों को गरीब जनता के टैक्स से सुविधाओं पर बेन लगाए।

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