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दिमाग के जाले साफ करो और पढ़ो, महिला शिक्षा के बारे में ‘चालाक ब्राह्मण’ तिलक के विचार

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

इतिहास ने हमें जिसके बारे में जैसा बता दिया हम बचपन से उसे वैसा ही देखते चले आ रहे हैं. बाल गंगाधार तिलक को भी हम स्कूल के समय से लोकमान्य बुलाते आए हैं. लेकिन उनकी खुद की लिखी हुई किताब बताती है कि तिलक घोर जातिवाद को बढ़ावा देने वाले इंसान थे. आजकल वरिष्ठ पत्रकार सत्येन्द्र पीएस अपनी फेसबुक वॉल पर बाल गंगाधर तिलक की परतें खोल रहे हैं आप भी पढ़िए.

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तिलक स्त्री शिक्षा के विरोधी थे- 

बाल गंगाधर तिलक ने 1885 में लड़कियों का पहला हाई स्कूल खोले जाने के क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले के  प्रयासों के खिलाफ अभियान चलाया।
उसमें सफलता नहीं मिली तो तिलक ने लड़कियों के 11 बजे से 5 बजे तक घर से बाहर रहने का विरोध किया और लिखा कि कोई भी अपनी लड़की को इतने समय तक घर से बाहर नहीं रहने देगा। उन्होंने सुबह 7 से 10 या दोपहर 2 से 5 बजे तक कक्षाएं चलाने का सुझाव दिया और कहा कि शेष समय लड़कियों को घर के काम में हाथ बटाने में देना चाहिए।

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लड़कियां पढ़ लिख गईं तो पतियों का विरोध करेंगी- 

तिलक ने कहा कि पढ़ लिखकर लड़कियां रख्माबाई जैसी हो जाएंगी जो अपने पतियों का विरोध करेंगी।उन्होंने पाठ्यक्रम में बदलाव कर लड़कियों को पुराण, धर्म और घरेलू काम जैसे बच्चों की देखभाल, खाना बनाने की शिक्षा तक सीमित रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इसके अलावा लड़कियों को शिक्षा देना करदाताओं के धन की बर्बादी है। लड़कियों का पहला विश्वविद्यालय 1915-16 में खोले जाने की दोन्धो केशव करवे की कवायद तक तिलक का यह रुख कायम रहा

हिन्दू लड़की को बेहतरीन बहू के रूप में विकसित किय जाना चाहिए- 

20 फरवरी 1916 को उन्होंने अपने मराठा अखबार में इंडियन वूमेन यूनिवर्सिटी शीर्षक से लिखे लेख में कहा,

” हमे प्रकृति और सामाजिक रीतियों के मुताबिक चलना चाहिए। पीढ़ियों से घर की चहारदीवारी महिलाओं के काम का मुख्य केंद्र रहा है। उनके लिए अपना बेहतर प्रदर्शन करने हेतु यह दायरा पर्याप्त है। एक हिन्दू लड़की को निश्चित रूप से एक बेहतरीन बहू के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। हिन्दू औरत की सामाजिक उपयोगिता उसकी सिम्पैथी और परंपरागत साहित्य को ग्रहण करने को लेकर है। लड़कियों को हाइजीन, डोमेस्टिक इकोनॉमी, चाइल्ड नर्सिंग, कुकिंग, sewing आदि की बेहतरीन जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए ”

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#राष्ट्रवाद p 104, 115, 116, 262, 263

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