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मोदीराज में घर बैठने को मजबूर कामकाजी औरतें, 131 देशों में भारत 120 वें पायदान पर

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

पीएम मोदी के राज में नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी तेजी से घट रही रही है. हालत ये है आज भारत में कामकाजी महिलाओं की संख्या महिलाओं के कामकाज को लेकर रूढ़िवादी माने जाने वाले कई मुस्लिम देशों से भी कम हो गई हैं. आज बहुत अच्छी पढ़ाई करने के बावजूद भी महिलाओं को घर की चार दीवारों में ही सिमटने को मजबूर होना पड़ रहा है.

131 देशों में भारत की रैकिंग 120 है- 

देश की लेबर फोर्स में महिलाओं की तादाद बेहद कम है. रोजगार से जुड़े तमाम सेक्टरों में महिलाओं की हिस्सेदारी तेजी से घट रही है. सोमवार को जारी हुई इंडिया डेवलपमेंट रिपोर्ट के मुताबिक 131 देशों के बीच इस मामले में भारत की रैंकिंग 120 है.

इस मामले में बांग्लादेश समेत कई मुस्लिम देशों से भी हम खराब स्थिति में है. रोजगार से जुड़े सेक्टरों में भारतीय महिलाओं की हिस्सेदारी, पाकिस्तान, यमन और मिस्त्र जैसे मुस्लिम देशों के साथ सबसे खराब हालत में हैं.

कई अन्य मुस्लिम देशों में श्रम बल में महिला कर्मियों की हिस्सेदारी भारत की हिस्सेदारी से ज्यादा है. भारत में कुल श्रम बल में महिला कर्मियों की हिस्सेदारी 27 फीसदी है, जबकी चीन और ब्राजील जैसे उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में महिला कर्मियों की हिस्सेदारी 65 से 70 फीसदी है. श्रीलंका और बांग्लादेश भी महिला कर्मियों की हिस्सेदारी के मामले में भारत से आगे हैं.

सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि भारत में 2005 के बाद महिला कर्मियों की तादाद में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. यह स्थिति तब है, जब काम करने की योग्यता रखने वाली महिला कर्मियों में 42 फीसदी ग्रेजुएट हैं.

वर्ल्ड बैंक की इंडिया डेवलपमेंट रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर ज्यादा महिलाओं को रोजगार दिया जाए तो अर्थव्यवस्था की विकास दर एक फीसदी तक बढ़ सकती है. भारत में ज्यादातर महिलाएं अब भी खेती-बाड़ी के काम में लगी हैं. उद्योगों और सर्विस सेक्टर में उनकी हिस्सेदारी 20 फीसदी से भी कम है.

क्यों कम हो रही है महिलाकर्मियों की संख्या- 

-देश में महिला कर्मियों की संख्या में लगातार गिरावट की कई वजहें गिनाई गई हैं.  जैसे बड़ी तादात में लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट रही है.

-नौकरी में सुविधाओं और सुरक्षा की कमी की वजह से उन्हें बीच में ही काम छोड़ना पड़ता है। महिलाओं की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है. भारतीय समाज में उनके लिए तेजी से बढ़ रही असुरक्षा उन्हें घर से बाहर निकल कर रोजगार हासिल करने से रोक रही है.

-रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जो महिलाएं खेती-बाड़ी के काम से बाहर निकलना चाहती हैं उन्हें दूसरे सेक्टरों में काम नहीं मिल पा रहा है। महिलाएं काम करना चाहती हैं लेकिन उनके लिए पर्याप्त नौकरियां पैदा नहीं की जा रही हैं.

अमूमन दुनिया भर में देखा गया है कि महिला उद्यमी महिलाओं के लिए ज्यादा नौकरियां पैदा करती हैं लेकिन भारत में यह रफ्तार भी कम है. वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में भारत में महिला कामगारों की घटती संख्या पर काफी चिंता जताई गई है क्योंकि उनकी आय घरों की गरीबी कम करने में मददगार साबित होती है.

 

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