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सहारनपुर हिंसा में दलितों के साथ यादव-मुस्लिम वकील, सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका

नई दिल्ली। सोबरन कबीर यादव

सहारनपुर जातीय हिंसा में दलितों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के दो अधिवक्ता गौरव यादव और मुनव्वर अली कुरैशी आगे आए हैं. सामाजिक न्याय और वंचितों द्वारा एक दूसरे के दुख साझा करने की मुहिम के लिए दोनों वकीलों का प्रयास एक नया आयाम होगा. दोनों ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिका फाइल कर दी है.

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क्या है याचिका में- 

इस रिट पिटीशन के जरिए गौरव यादव और मुनव्वर अली कुरैशी ने  जांच, पीड़ितों को क्षतिपूर्ति, पुलिस-संरक्षण तथा दोषियों को दंडित करने की मांग की है.  पिछले एक महीने से सहारनपुर जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है. राज्य की योगी सरकार पर आरोप लग रहा कि वह ठाकुर बिरादरी के लोगों को ही बचा रही है और दलितों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण रवैया अपना रही है. पुलिस की एकपक्षीय कार्रवाई से ही सहारनपुर में हिंसा बढ़ गई है.

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सोशल मीडिया में मिल रही हैं बधाई- 

सोशल मीडिया पर सामाजिक समता के पक्षधर इन दोनों वकीलों की जमकर प्रशंसा हो रही है. बीएचयू के रिटायर्ड प्रो. चौथीराम यादव ने इन दोनों वकीलों को सामाजिक न्याय का योद्धा बताया है. प्रोफसर साहब ने कहा कि इस बात का सूचक है कि भारत अभी देश बनने की प्रकिया से गुजर रहा है. दोनों ने वंचित समाज के दर्द को समझते हुए जो कदम  उठाया है वो सराहनीय है.

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सभी वंचितों को एक दूसरे के हक के लिए आगे आना होगा- 

वरिष्ठ पत्रकार और चिंतक दिलीप मंडल लिखते हैं कि जब तक इस देश में दलितों के ऊपर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई में पिछड़े शामिल नहीं होंगे, जब तक आदिवासियों के खिलाफ हो रहे अत्याचार से लड़ने के लिए दलित और पिछड़े शामिल नही होंगे और जब तक मुसलमानों के साथ हो रहे अन्याय में दलित, पिछड़े,आदिवासी शामिल नहीं होंगे तब तक हम कबीलों में बंटे समूह ही हैं. हमें देश नहीं कहा जा सकता. देश तो वो होता है जहां लोगों का दर्द भी साझा होता है और संघर्ष भी साझा होता है.

सहारनपुर हिंसा के खिलाफ केस फाइल करने वाले इन दोनों वकीलों ने भारत को कबीले से देश बनने की राह पर खड़ा कर दिया है.

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