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चर्चित हो गई यादव जी की सामाजिक न्याय वाली शादी, बारातियों में बंटी ‘गुलामगीरी’ और ‘संविधान’

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थी सुरेश यादव सत्यार्थी की शादी पूरे जौनपुर जिले में चर्चा का विषय बन गई है। इस विवाह में ब्राह्मणवादी रीति -रिवाजों को तोड़कर मानवतावादी और संविधानवादी रीति को विवाह पद्धति के तौर पर अपनाया गया. इसी के साथ विवाह में संविधान की प्रतियां और बहुजन महापुरुषों के ऊपर लिखी किताबें जैसे गुलामगिरी, चमचा युग, सच्ची रामायण , वैदिक आर्यों का पोल प्रकाश आदि किताबों को बांटा गया।

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द्वार -चार की जगह संवैधानिक मूल्यों की शपथ दिलाई गई.

आपको बता दें कि दूल्हा के घर हंडिया, इलाहबाद से बारात लड़की के घर जौनपुर, उ.प्र. पहुंची | लड़की के घर-द्वार पर पहुँचने के साथ सभी उपस्थित जनसमुदाय के समक्ष दोनों पक्षों के परिवारों का परिचय हुआ | इसके बाद दिए गए उत्तरदायित्व के अनुसार मैंने संविधान में सन्निहित मानवीय गरिमा के स्वाभाविक मूल्य समानता, स्वतंत्रता और बंधुता की शपथ दिलाई | उसके बाद अपनी भूमिका को आगे बढ़ाते हुए मैंने इस ऐतिहासिक अवसर पर आदरणीय प्रोफेसर कालीचरण स्नेही जी से संविधान की प्रस्तावना पढ़ने हेतु अनुरोध किया |

जिसे प्रोफेसर स्नेही जी ने सप्रेम स्वीकार किया | यह एक सार्वजनिक इच्छा उपस्थित लड़की-लड़का, दोंनो के परिजन, शोधार्थियों, प्रोफेसरों आदि की थी | संयोग से प्रोफेसर स्नेही जी के निर्देशन में हिंदी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय से सुरेश सत्यार्थी शोध कर रहे हैं | प्रोफेसर स्नेही सर ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया | जिसे लड़का, लड़की के पिता पारिवारिक जन, उपस्थित सभी महिलाओं, घराती-बारातियों आदि ने एक साथ दोहराया | इसके बाद दुल्हन के पिता ने दूल्हे का फूलों और फलों से स्वागत किया | दूल्हे ने लड़की के पिता को संविधान की प्रति भी भेंट की

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ब्राह्मणवादी विवाह पद्धति में दुल्हन का पिता अपना मान-सम्मान , धन -दौलत आदि सब-कुछ लड़के वालों के पास गिरवी रख देता है. पर इस मानवतावादी विवाह की खासियत देखिए यहां स्वागत के बाद दूल्हे ने लड़की के पिता को ‘संविधान’ की एक प्रति भेंट की.

ल्हा और दुल्हन के मंच पर उपस्थित होने के बाद आशीष दीपांकर ने उन्हें गुलाब के फूलों के साथ अपनी महान विभूतियों के चित्र पर वैचारिक शपथ दिलाते हुए पुष्पांजलि आदि अर्पित करवाया. इस विवाह अवसर के सबसे प्रमुख साक्षी मूल चेतना की महान विभूतियाँ—- छत्रपति साहू जी महाराज, ज्योतिबा फूले, प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फूले, प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख, बिरसा मुंडा, बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर, पेरियार ई. वि. रामास्वामी, पेरियार ललई, डॉ. राममनोहर लोहिया, वी.पी. मंडल, पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह और वीरांगना फूलन देवी की चित्ररूप में रहे.

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इसके बाद विवाह माला आदि की पद्धति को आदरणीय राजवीर सिंह ने अदा करवाया | इस ऐतिहासिक अवसर पर मूल चेतना का साहित्य अर्थात् 10 हजार मूल चेतना की किताबें वितरित की गईं | जिसमें मुख्या थीं — संविधान, छत्रपति साहू जी महाराज : व्यक्तित्व और कृतित्व, गुलामगीरी, दिमागी गुलामी, सवित्रीबाई फूले एक परिचय, डॉ. अम्बेडकर व्यक्तित्व और कृतित्व, महिषासुर एक पुनर्पाठ, हिन्दू बनाम हिन्दू, सच्ची रामायण, एकलव्य नाटक, सृष्टि और प्रलय, महान विद्रोहिणी वीरांगना फूलन देवी आदि |

कई सामाजिक चिंतक समेत देश के 12 विश्वविद्यालयों से रिसर्चर आए और इस अनूठी शादी के गवाह बने

इस अवसर पर प्रोफेसर कालीचरण, वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव, प्रोफेसर सूरज बहादुर थापा, 12 विश्वविद्यालयों से आये हुए शोधार्थी साथी और आस-पास के ग्रामीण लोग साक्षी हुए | वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव, प्रोफेसर कालीचरण स्नेही और प्रोफेसर सूरज बहादुर थापा जी का ‘विवाह में व्याख्यान’ शीर्षक से मिथक और विवाह पर अत्यंत महत्वपूर्ण व्याख्यान हुआ |

पूरे जौनपुर जिले में ये अनूठी शादी बनी चर्चा का विषय- 

सारे जौनपुर जिले में ये अनूठी शादी चर्चा का विषय बन गई है. इस अनूठी शादी में शरीक होने जिले के दूर दराज के इलाके से लोग आए और इस एतिहासिक शादी के गवाह बने.

धर्मवीर यादव गगन के दिमाग की उपज है ये विवाह पद्धति- 

ये विवाह पद्धति दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध छात्र धर्मवीर यादव गगन के दिमाग की उपज है. दरअसल , धर्मवीर और सुरेश मित्र हैं और सुरेश ने कुछ दिन पहले धर्मवीर को अपनी शादी तय होने की सूचना दी. साथ ही ये भी कहा कि वे ये शादी कुछ अलग ढंग से करना चाहते हैं. तब धर्मवीर ने सुरेश को मानवतावादी और संविधानवादी ढंग से शादी करने का सुझाव दिया. सुरेश सहर्ष इस विवाह पद्धति से विवाह करने को राजी हो गए. विवाह में शामिल हुए कई लोगों ने अपने परिजनों का विवाह इसी विवाह पद्धति से कराने के लिए हामी भरी है.

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