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यशवंत सिन्हा ने किया PM मोदी पर पलटवार, शल्य नहीं, भीष्म हूं, अर्थव्यवस्था का चीरहरण नहीं होने दूंगा

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो

देश की गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष के साथ ही बीजेपी के भीतर से भी विरोध से स्वर मजबूत होते जा रहे हैं। यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा के बाद अरुण शौरी ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हमलों से आहत पीएम ने बुधवार को इन बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। पीएम के बयान के जवाब में एक बार फिर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने लचर अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला है।

मोदी ने बुधवार को पहली बार अर्थव्यवस्था में सुस्ती की बात स्वीकारते हुए आलोचकों से कहा कि वे नकारात्मकता न फैलाएं। इसके साथ ही उन्होंने अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने का वादा किया।

उन्होंने आलोचकों की तुलना महाभारत के शल्य से की, जो कर्ण का सारथी था। वह हमेशा राजा को हतोत्साहित करता रहता था। मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत है।

इस पर यशवंत सिन्‍हा ने जवाब दिया है कि ”मैं शल्‍य नहीं, भीष्‍म हूं। भीष्‍म तो नहीं बोले थे मगर मैं बोलूंगा और अर्थव्‍यवस्‍था का चीरहरण नहीं होने दूंगा।” सिन्‍हा ने कहा, ”महाभारत में हर तरह के चरित्र हैं, शल्‍य भी उनमें से एक है।

सिन्हा ने कहा कि महाभारत में एक और चरित्र है भीष्‍म पितामह। भीष्‍म पर आरोप है कि जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तो वे खामोश रह गए। अब अगर अर्थव्‍यवस्‍था का चीरहरण होगा तो मैं बोलूंगा।”

सिन्‍हा यही नहीं रुके। उन्‍होंने आगे कहा, ‘मुझे अंदाजा नहीं था कि जवाब देने के लिए खुद प्रधानमंत्री आगे आ जाएंगे। आकंड़ों का खेल खतरनाक होता है, आप कुछ साबित करेंगे, मैं दूसरे आंकड़े से दूसरी बात साबित कर दूंगा। जमीनी हकीकत की ओर देखिए।”

मोदी ने कहा था, “पिछले तीन सालों में 7.5 प्रतिशत विकास दर के बाद गिरावट आई है। मैं इससे इंकार नहीं कर रहा। सरकार अर्थव्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है। हम निर्णय लेने के लिए तैयार हैं। हमने कई सारे कदम उठाए हैं। वित्तीय स्थिरता बनाए रखी जाएगी। हम निवेश और आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।”

मोदी ने यह बात ऐसे समय में कही थी, जब यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, शत्रुघ्न सिन्हा और विपक्षी दलों ने आर्थिक सुस्ती और बेरोजगारी को लेकर तीखा हमला बोला है, जिसके बाद अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर बहस शुरू हो गई है।

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देश की गिरती अर्थव्यवस्था के जितने जिम्मेदार अरुण जेटली हैं उससे कहीं ज्यादा PM मोदी भी हैं

 

 

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