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अब BJP के सहयोगी अपना दल (एस) की CM से डिमांड, हर जिले में चाहिए OBC-SC वर्ग का DM या SP

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

सत्ता एक निश्चित समय के लिए पावर तो लेकर आती है लेकिन मंझे हुए राजनीतिज्ञ ये भली भांति जानते हैं कि लोकतंत्र में असली पावर हमेशा जनता के हाथ में होती है। जनता अगर रूठ गई तो पावर, पैसा, कूटनीति, चाणक्यनीति सब धरी की धरी रह जाती है।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के बाद अपना दल( एस) ने भी गोरखपुर और फूलपुर में जनता के इसी गुस्से को महसूस करते हुए योगी सरकार को चेताया है।

सवर्णवाद में डूबी भगवा सरकार को अपना दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल ने पिछड़ों और दलितों के गुस्से से वाकिफ कराया है। आशीष पटेल ने देरी से ही सही लेकिन एक मजबूत मांग भारतीय जनता पार्टी की सरकार के सामने रखी है।

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हर जिले में डीएम या एसपी में से एक ओबीसी चाहिए- 

सरकार बनने के बाद से ही योगी सरकार पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में ठाकुरवाद और ब्राह्मणवाद के आरोप लगने शुरू हो गए। बची हुई कसर प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने अपने समाज के लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाकर पूरी कर दी।

योगी सरकार में मंत्रिमंडल गठन के समय भी ओबीसी-एससी विधायकों की उपेक्षा से लोग आहत थे ही। सरकार बनने के बाद स्थिति ये बनी कि सरकार में सवर्ण जातियों को छोड़कर पिछड़ें और दलित अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में उपेक्षा की जाने लगी।

फोटो- राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष सिंह पटेल के साथ राष्ट्रीय प्रवक्ता बृजेन्द्र प्रताप सिंह

आशीष पटेल ने जनमानस के गुस्से को भांपते हुए सरकार से कहा कि हर जिले में डीएम या एसपी में से कम से कम एक अधिकारी ओबीसी या एससी वर्ग का तैनात करिए ताकि वंचित तबके का उत्पीड़न ना हो।

50 फीसदी थानाध्यक्ष दलित-पिछड़े बनाए जाएं- 

आशीष पटेल ने दूसरी मांग रखी कि थानों में भी पिछड़े-दलित सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टरों को कम से कम 50 फीसदी हिस्सेदारी दी जाए। नेशनल जनमत से बातचीत करते हुए श्री पटेल ने कहा कि गांव का व्यक्ति सबसे पहले अपनी समस्या लेकर थाने पहुंचता है अगर वहां से उसकी समस्या का निदान हो जाए तो किसान को कहीं भटकने की जरूरत ना पड़े।

वंचित समाज की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो रहीं- 

आशीष सिंह पटेल ने कहा कि जिस उम्मीद के साथ वंचिक तबके ने लोकसभा और उसके बाद उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को वोच दिया था उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पा रहीं।

आशीष बोले जब बीजेपी के ही कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जा रही तो सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओ की बात ही करना बेमानी है। हालांकि बाद में उन्होंने ये भी स्पष्ट किया है हम एनडीए के साथ हैं इसलिए राज्यसभा चुनाव में हमारे विधायक बीजेपी का ही सहयोग करेंगे।

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