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धार्मिक CM के राज में बुंदेलखंड में भूख ने ले ली एक दलित मजदूर की जान, 7 दिन से नहीं जला था चूल्हा

नई दिल्ली/बुंदेलखंड, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

गाय-गंगा, धर्म-अधर्म, पाप-पुण्य, मंदिर-मस्जिद के फेर में फंसे धार्मिक सीएम की प्राथमिकता शायद मंदिर और धर्म से ऊपर नहीं बढ़ पा रही है। यही वजह है कि जरूर मुद्दे पीछे हैं लेकिन पूरे प्रदेश में भगवावाद हावी है।

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में एक दलित मजदूर की भूख से मौत होने का मामला आया है। ख़बरों के मुताबिक, तंगहाली और गरीबी के चलते मजूदर के घर करीब एक सप्ताह से चूल्हा नहीं जला था। मनरेगा में भी उसे काम करने के पैसे नहीं मिले। उसके बच्चे भीख मांग कर अपना भेट भर रहे थे। मृतक की पत्नी के अनुसार, दो वर्षों से खेतों में अनाज पैदा नहीं हुआ है।

ये दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के महोबा जिले की सदर तहसील के घनडुवा गांव का है। गांव में रहने वाले दलित मजदूर छुट्टन के पास कुछ बीघा जमीन थी। लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह अपने खेत नहीं जोत सका।

छुट्टन और उसकी पत्नी ऊषा अपने तीनों बच्चों और मां के पालन पोषण के लिए मनरेगा में मजदूरी करते थे। लेकिन दोनों को मजदूरी का पैसा नहीं मिला। जिसके चलते दोनों गुरबत की ज़िंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ा।

मृतक की पत्नी ने बताया कि, दो वर्षों में खेतों में कम पैदावार के चलते हम परेशान हो उठे। पिछले एक सप्ताह से मेरे पास पति को खिलाने के लिए कुछ नहीं था।

वहीं मलले की जांच करने पहुंचे एडीएम महेंद्र सिंह का कहना है कि परिवार की हालात बहुत ख़राब है लेकिन छुट्टन की मौत भूख से नहीं ब्लकि बीमारी से हुई है। उन्होंने परिवार को मृतक का अंतिम संस्कार कराने के लिए आर्थिक सहायता दी। वहीं परिवार को मनरेगा की मजदूरी न मिलने के कारणों की जांच करने का आदेश दिया है।

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