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स्मारकों को फिजूल खर्ची बताने वाली बीजेपी, वहीं महाराणा प्रताप-पृथ्वीराज की मूर्तियां लगाएगी

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो।

उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम की स्मृति में बनवाए गए पार्कों और स्मारक स्थलों को फिजूल खर्ची और जनता के पैसे की बर्बादी बताने वाली बीजेपी ने अब वहीं मूर्तियां लगाने का फैसला लिया है.

अब अंबेडकर स्मारक में अगड़ी जातियों के महापुरुषों की भी मूर्तियां लगेगी. योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने इसकी पहल करते अब महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान की मूर्तियां अंबेडकर पार्क में लगाने का निर्णय ले लिया है.

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यूपी के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर के अनुसार इन पार्कों और स्मारक स्थलों में महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान की मूर्तियां लगाई जाएंगी. साथ ही राजा सुहेलदेव राजभर, अहिल्याबाई होल्कर, सावित्रीबाई फुले, दक्ष प्रजापति, गुहराज निषाद की मूर्तियां लगाने का निर्णय भी लिया है.

धन की फिजूल खर्ची को मुद्दा बनाया था-

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने अप्रैल 2009 में लखनऊ में अंबडेकर स्मारक स्थल और पार्क बनवाकर उनमें विभिन्न महापुरुषों की सात फीट ऊंची संगमरमर की मूर्तियां लगवाई थीं. इन स्मारक स्थलों में अंबेडकर, कांशीराम और खुद मायावती के अलावा ज्योतिबा फुले, बिरसा मुंडा, नारायण गुरु, छत्रपति साहुजी महाराज, कबीर दास, संत रविदास और गुरु घासीदास की मूर्तियां लगवाई थीं. इसक बाद पार्कों और स्मारकों को बीजेपी से जुड़े लोगों ने धन की फिजूल खर्ची बताया था.

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क्या कहती है ज्वाइंट एक्शन कमेटी-

इस मामले में छात्रों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने आंदोलन की चेतावनी दी है.ज्वाइंट एक्शन कमेटी के मुलायम सिंह यादव ने कहा कि बहुजन महापुरुषों की पहचान मिटाने के लिए भाजपा सरकार ये काम कर रही है इसका विरोध किया जाएगा.

ज्वाइंट एक्शन कमेटी के छात्र नेता श्रेयत बौद्ध का कहना है कि बहुजन समाज के प्रतीकों को नष्ट करने की यह चाल है. रविदास समाज सुधारक थे, उन्हें संत और भगवान बना दिया. उन्हें खत्म कर दिया सामंतवादियों ने. अब बाबा साहेब के प्रतीक चिन्हों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. यह ठीक नहीं है. इसके पहले मंदिरों में ओबीसी-एससी और एसटी के लोगों को पुजारी बनाया जाए. इसके खिलाफ पूरे प्रदेश में ज्वाइंट एक्शन कमेटी आंदोलन करेगी.

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