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इलाहाबाद: शिक्षा विभाग में कार्यरत रामचंद्र पटेल की हत्या, पुलिस और नेताओं के रवैये से परिवार में आक्रोश

लखनऊ/इलाहाबाद, नीरज भाई पटेल (नेशनल जनमत) 

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में पिछड़ों-दलितों पर उत्पीड़न का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। कही सामंती सोच के लोग दलितों पर हमले कर रहे हैं तो कहीं पिछड़ों की हत्याएं हो रही हैं।

सरकार में शामिल पिछड़े समाज के नेताओं खास तौर पर कुर्मी समाज के नेता समाज के लोगों की हत्याओं पर आंख-मूंदे हुए हैं। समाज के नेताओं का आलम ये है कि कोई अपनी कुर्सी बचाने के लिए हवन-पूजन में व्यस्त है तो कोई मंत्री पद पाने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेताओं की जी हजूरी में लगा हुआ है।

इलाहाबाद क्षेत्र के आसपास के पटेलोंं को अपना वोट बैंक बताने वाले अपना दल (एस) के नेता प्रतापगढ़, इलाहाबाद क्षेत्र में लगातार हो रहे समाज के उत्पीड़न और हत्याओं पर चुप्पी साध के बैठे हैं। सिर्फ विधायक डॉ. आरके वर्मा जरूर समाज के नाम पर थोड़ा बहुच प्रयास करते नजर आते हैं। 

शिक्षा विभाग के कर्मचारी की हत्या- 

अब परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय इलाहाबाद में लिपिक के पद पर तैनात रामचंद्र पटेल (57) की 15 मई की रात हत्या कर दी गई. 16 मई की सुबह उनकी बॉडी सेवइत रेलवे स्टेशन के पास नहर पुलिया पर मिली. रामचंद्र का शरीर नीला पड़ गया था. पोस्टमार्टम में सिर पर चोट से मौत की पुष्टि हुई.

रामचन्द्र शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा का पेपर पहुंचाने रामपुर गये थे. वहां से लखनऊ होते हुए साथी कर्मचारियों के साथ लौट रहे थे. साथियों ने उन्हें म्योहाल चौराहे के पास कार से उतार दिया था.

औरेया जिला पंचायत में जेई बड़े बेटे विजय पटेल का आरोप है कि पुलिस पूरे मामले में सिर्फ खाना पूर्ति में लगी है। समाज के नाम पर वोट लेने वाले नेता लगातार हो रही हत्याओं पर चुप्पी साधे बैठे हैं।

‘नेशनल जनमत’ से बातचीत में विजय पटेल ने स्पष्ट कहा कि मेरे पिता की हत्या का सीधा संबंध विभाग से है। ठीक से जांच की जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि किन शिक्षा माफियाओं के इशारे पर पिता की हत्या की गई है। पुलिस ने शुरूआती जांच में इसे एक्सीडेंट बता दिया था जबकि सच्चाई ये है कि मेरे पिता के सर पर डंडों से चोट के गंभीर निशान थे।

लखनऊ से घर में किया था फोन- 

धूमनगंज थाना क्षेत्र के प्रीतम नगर के रहने वाले रामचंद्र पटेल एलनगंज स्थित परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में क्लर्क थे. घरवालों का कहना है कि विभागीय कार्य के लिए वह रामपुर गए थे. वहां से लखनऊ में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने चले गए. 16 मई की रात दो बजे सभी इलाहाबाद पहुंचे.

रास्ते से रामचंद्र ने घरवालों को फोन किया कि वह घर पहुंचकर खाना खाएंगे. इसके बाद मोबाइल ऑफ हो गया. सुबह घरवालों के पास फोन आया कि रामचंद्र पटेल का शव सोरांव थाना क्षेत्र के सेवइत में नहर पुलिया के पास पड़ा है. रामचंद्र के छोटे बेटे सचिन पटेल ने हत्या की आशंका जताते हुए सोरांव थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया.

सीओ सोरांव का कहना है- 

सीओ सोरांव ने बताया कि रात में विभाग के जिन कर्मचारियों ने रामचंद्र को म्योहाल चौराहे के पास के पास छोड़ा था, उसने पूछताछ हुई है. उनका कहना है कि वह घर तक छोड़ने को तैयार थे लेकिन रामचंद्र ने मना कर दिया था. बाबू के घरवालों का कहना है कि कई मामलों की जांच में शिक्षा माफिया फंस रहे थे. ऐसे में शिक्षा माफिया रामचन्द्र की हत्या करा सकते है.

जब से पटल में हुआ था बदलाव चिंतित थे- 

विजय पटेल ने बताया कि हाल फिलहाल ही उनके पटल में बदलाव किया गया था इसके बाद से ही वो घर में भी चिंतित रहते थे। कहते थे पता नहीं छोटे बेटे की शादी कर पाउंगा या नही। ऑफिस में कुछ लोगों के बारे में कहते थे कि ये लोग मुझसे गलत काम कराना चाहते हैं मैं नहीं करता तो मुझसे जलते हैं।

साथियों का कहना है- 

यूपी एजूकेशनल मिनिस्टिरियल आफिसर्स एसोसिएशन के मंडलीय सचिव एसएन आब्दी ने बताया कि लखनऊ में 15 मई को एसोसिएशन की तरफ से लखनऊ में बेसिक कार्यालय के समक्ष धरने का प्रोग्राम था. रामचन्द्र भी वहां पहुंचे थे.

रात में करीब आठ बजे वह एसोसिएशन के पदाधिकारियों परमिल कुमार श्रीवास्तव व विजय शंकर पाण्डेय के साथ उनकी कार से इलाहाबाद के लिए निकले थे. सुबह दोनों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि देर रात म्योहाल चौराहे पर रामचन्द्र पटेल कार से उतर गये. कहा कि वह सब्जी लेकर मुंडेरा जाने वाले किसी वाहन से लिफ्ट लेकर चले जाएंगे.

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