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ठाकुरवाद: योगीराज में 3 ठाकुर अधिकारियों को खुली छूट, एक साल तक कुछ भी करो कोई नहीं छेड़ेगा

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो 

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार के समय यादववाद का रोना रोने वाले भाजपाईयों ने उत्तर प्रदेश में ठाकुर अजय सिंह बिष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनते ही जमकर सवर्णवाद और ठाकुरवाद करना शुरू कर दिया है। जिन ठाकुर अधिकारियों ने अखिलेश सरकार के समय खूब मलाई काटी आज वही ठाकुर अधिकारी सपाई से संघी बन गए।

ना सिर्फ ऐसे अधिकारी ठाकुर जैक के सहारे मलाईदार पदों पर जमे हैं बल्कि उनको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से 1 साल तक पद पर बने रहकर लूट खसोट करने की अघोषित आजादी भी दे दी गई है।

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सिर्फ कमाऊ और भक्त टाइप के अफसरों का है बोलबाला-

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सत्ता कोई भी मुख्यमंत्री कोई भी रहे अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में सिर्फ तीन चीजें देखी जाती हैं।

1- एक तो उसकी जाति

2- वो कितना कमाकर मंत्री जी को खुश रख सकता है.

3- सरकार के रंग के हिसाब से वो कैसे अपनी मानसिकता बदलता है।

सीनियर पीसीएस स्तर के एक अन्य अधिकारी ने सहमति जताते हुए कहा कि काम और आपकी काबिलियत कोई मायने नहीं रखती जो इन तीनों फन में माहिर वही सरकार का चहेता है। बाकि अच्छा प्रशासन, ईमानदार अधिकारी की बातें सब चोचले बाजी हैं।

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ये है वो तीन जैक रखने वाले अधिकारी- 

 

पहले राज्यसरकार ने तीन ठाकुर अधिकारियों का ट्रांसफर किया , लेकिन 29 जून को अपने ही निर्णय से बदलते हुए-

अविनाश सिंह नगर आयुक्त कानपुर को एक साल की फिक्स पोस्टिंग के साथ ट्रांसफर रद्द करते हुए नगर आयुक्त कानपुर के पद पर यथावत रखा गया।

सपा सरकार में तीन साल तक एडीएम लखनऊ रहे। बीजेपी आते ही कानपुर नगर आयुक्त के पद पर एक साल तक कोई नहीं छेड़ेगा।

विशाल भारद्वाज अपर निदेशक स्थानीय निकाय निदेशालय लखनऊ से विशेष सचिव नगर विकास विभाग में हुआ तबादला निरस्त करते हुए एक साल के लिए यशावत रखने का आदेश हुआ.

सपा सरकार में तीन साल अपर आयुक्त नगर निगम लखनऊ थे। दो साल से इसी पद पर  जमे हैं।

विजय कुमार सिंह अपर निदेशक सूडा लखनऊ से विशेष सचिव राजस्व विभाग के पद पर किया गया तबादला निरस्त करते हुए 1 साल के लिए यथावत रखा गया।

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‘नेशनल जनमत’ का सवाल- 

सरकार ट्रांसफर  पोस्टिंग करते हुए कारण बताती है जनहित में लेकिन पहले जनहित में किए गए ट्रांसफर में अचानक से ऐसा कौन सा जनहित आ गया कि ना सिर्फ ट्रांसफर को रद्द कर दिया गया वो भी तीनों सवर्ण अधिकारियों का।

कई बार कतिपय कारणों से ट्रांसफर रद्द भी होते हैं लेकिन ऐसा इन अधिकारियों में क्या है इनको एक साल तक  विभाग में खेल करने की अघोषित छूट दे दी गई।

बहरहाल सरकार बदली है लेकिन आज भी काम करने वाले अधिकारी फाइलें ढो रहे हैं जबकि सेटिंगबाज अधिकारी अपनी जाति का जैक लगाकर ना सिर्फ पदों पर जमे हैं बल्कि पद का दुरुपयोग भी भरपूर कर रहे हैं।

 

 

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