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यूरिया की बोरी का वजन घटाकर देश भर के किसानों को मूर्ख बनाएगी मोदी सरकार !

नई दिल्ली। नीरज भाई पटेल ( नेशनल जनमत )

केन्द्र की मोदी सरकार ने किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी से बचने के लिए एक अनोखा तरीका ढूंढ निकाला है. अब किसानो को दी जाने वाली यूरिया खाद की बोरी जो 50 किलो की होती थी उसे अब उसे 45 किलो करने की तैयारी कर ली गई है.

कैसे बचेगी सब्सिडी- 

सरकार यूरिया सब्सिडी पर साल भर में 6 से 7 हजार करोड़ रुपये बचाना चाहती है. उसके लिए ये प्रयोग लेकर आए हैं कि 50 किलो की जगह 45 किलो की बोरी लाई जाए. दरअसल किसान प्रति एकड़ के हिसाब से यूरिया की  खाद डालते हैं. जब बोरी 45 किलो की होगी तो भी वह प्रति एकड़ के हिसाब से बोरी के हिसाब से खाद डालेंगे. इस प्रकार सरकार एक बोरी में 5 किलो यूरिया कम देकर अपनी सब्सिडी बचा लेगी.

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ऐसे समझिए- 

जैसे साबुन कम्पनी वाले लागत बढ़ने पर 100 ग्राम का साबुन 90 ग्राम का करके उसी दाम पर बेच देते हैं. जिससे पब्लिक को लगता है दाम नही बढ़ा है और साबुन भी बिक जाता है. उसी तरह पांच किलो वजन घटाकर 50 किलो की जगह 45 किलो खाद उसी दाम पर बेचकर सरकार सालाना 7000 करोड़ रुपये सब्सिडी बचा लेगी.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट- 

वरिष्ठ पत्रकार सत्येन्द्र प्रसाद सिह अपने फेसबुक वॉल पर लिखते है कि यह सरकार निहायत मूर्ख है या जनता को मूर्ख समझती है. किसान को तो एकदम भिखमंगा और मूर्ख समझ रखा है जो बोरा गिनकर खाद डालता है, उसे वजन तौलना नहीं आता.

देश में ज्यादातर किसान छोटी जोत के हैं और वो तौलकर ही खाद डालते हैं। यहाँ तक कि आप कस्बाई बाजारों में जाएं तो किलो के हिसाब से खुली बोरी खाद बिकते आसानी से पा सकते हैं.

वो सवाल उठाते हैं कि सरकार ने अभी ये नहीं बताया है कि यूरिया की बोरी अभी कितने में मिल रही है और 45 किलो की बोरी होने पर कितने में मिलेगी. यह बेईमान और धूर्त सरकार है।

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सब्सिडी का रोना बंद करिए- 

सत्येन्द्र सिंह आगे लिखते हैं कि सरकार अब ये न कहे कि किसानों को सब्सिडी की भीख दी जाती है. स्वामीनाथन समिति की सिफारिश लागू करिये. लागत के मुताबिक किसान को उपज का दाम दीजिए. किसान को किसी सब्सिडी की कोई जरूरत नही पड़ेंगी. 

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